लाओस में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से वियतनाम की चिंता बढ़ी, क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया खतरा

Edited By Updated: 16 Oct, 2026 08:52 PM

china s growing military presence in laos has heightened vietnam s concerns

लाओस में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और शक्ति संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। खास तौर पर वियतनाम के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लंबे समय से लाओस को अपनी पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक...

इंटरनेशनल डेस्क : लाओस में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा और शक्ति संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। खास तौर पर वियतनाम के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लंबे समय से लाओस को अपनी पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से अहम सहयोगी मानता रहा है। चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों, लाओस में नेतृत्व परिवर्तन और बीजिंग पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता के बीच हनोई के सामने अपने पारंपरिक प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो रही है।

लोवी इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ हंटर मार्स्टन ने पिछले सप्ताह कहा था कि वियतनाम को पहले से ही चारों ओर से घिरने की आशंका है, क्योंकि चीन दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों और सैन्य ठिकानों को लगातार मजबूत कर रहा है।

चीन के सैन्य केंद्र के बाद वियतनाम-लाओस की अहम बैठक

8 अक्टूबर को वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ने लाओस के नवनियुक्त प्रधानमंत्री सलेमक्से कोम्मासिथ से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अपने देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विशेष संबंधों को दोहराया। हालांकि, इस बैठक का महत्व इसके समय को लेकर अधिक है।

यह मुलाकात चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से लाओस के बान केउन हवाई अड्डे पर संयुक्त सैन्य सहायता और प्रशिक्षण केंद्र खोलने की घोषणा के करीब एक सप्ताह बाद हुई। इसके अलावा, यह लाओस की नेशनल असेंबली द्वारा सलेमक्से को प्रधानमंत्री चुने जाने के कुछ ही दिनों बाद आयोजित की गई। उन्होंने सोनेक्से सिफानडोन की जगह ली है, जिन्हें अब नेशनल असेंबली का अध्यक्ष बनाया गया है।

बीजिंग का कहना है कि इस केंद्र का उद्देश्य लाओस की वायु सेना के पायलटों को प्रशिक्षण देना है और इसका इस्तेमाल किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक, केंद्र की वास्तविक भूमिका का आकलन उसके आधिकारिक नाम से नहीं, बल्कि वहां तैनात सैन्यकर्मियों, उपकरणों और भविष्य में उसकी गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा।

उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों में वहां हल्के लड़ाकू विमान और सहायक वाहन दिखाई देने की बात सामने आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में केंद्र का विस्तार किस हद तक होता है और वहां सैन्य पहुंच तथा तैनाती से जुड़े नियम क्या रहते हैं।

लाओस में नेतृत्व परिवर्तन से हनोई की चिंता

लाओस में सत्ता परिवर्तन भी वियतनाम के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। पूर्व प्रधानमंत्री सोनेक्से सिफानडोन के परिवार के वियतनाम के साथ लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। उनके पिता और लाओस के पूर्व राष्ट्रपति खामते सिफानडोन को वियतनामी नेतृत्व एक पुराने मित्र के रूप में देखता था।

अप्रैल 2025 में खामते के निधन के बाद लाओस ने पांच दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी, जबकि वियतनाम में दो दिन का शोक मनाया गया था। यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

हालांकि, सोनेक्से का प्रधानमंत्री पद छोड़ना अपने आप में यह संकेत नहीं है कि लाओस की राजनीति में वियतनाम का प्रभाव समाप्त हो रहा है। उन्हें नेशनल असेंबली का अध्यक्ष बनाया जाना बताता है कि वह अब भी देश की सत्ता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इसी तरह, नए प्रधानमंत्री सलेमक्से कोम्मासिथ की नियुक्ति को भी सीधे चीन समर्थक गुट की जीत के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। उनके राजनयिक करियर में रूस और ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा प्राप्त करना तथा पश्चिमी देशों के साथ संबंधों से जुड़े दायित्व निभाना शामिल रहा है।

आर्थिक जरूरतें बदल रही हैं लाओस की रणनीति

विश्लेषण के मुताबिक, लाओस की विदेश नीति में बदलाव को समझने के लिए उसकी आर्थिक परिस्थितियों पर ध्यान देना जरूरी है। देश को निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक स्थिरता की जरूरत है। ऐसे में उसकी सरकार उन देशों के साथ समझौते करने के लिए तैयार हो सकती है, जो इन जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।

वियतनाम के लिए चिंता की बात यह है कि लाओस की नीतियों में पारंपरिक राजनीतिक और वैचारिक निकटता के मुकाबले आर्थिक लाभ को अधिक महत्व दिया जा सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि लाओस चीन के प्रति पूरी तरह राजनीतिक रूप से झुक गया है। बल्कि, आर्थिक दबाव और विकास की जरूरतें उसके रणनीतिक विकल्पों को प्रभावित कर सकती हैं।

चीन की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के जरिए अपने क्षेत्रीय प्रभाव को ठोस रूप दे सकता है। इससे लाओस जैसे छोटे और आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले देश के लिए बीजिंग के साथ संबंध बनाए रखना आकर्षक बन जाता है।

चीन-लाओस रेलवे ने बढ़ाई आर्थिक निर्भरता

लाओस में चीन का प्रभाव केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रेलवे परियोजना इस बढ़ते आर्थिक जुड़ाव का प्रमुख उदाहरण है। लाओस-चीन रेलवे का निर्माण 2016 में शुरू हुआ था। दिसंबर 2021 में लाओस के तत्कालीन नेता थोंगलोउन सिसोलिथ और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया। करीब 5.9 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना का मूल्य उस समय लाओस की जीडीपी के लगभग एक-तिहाई के बराबर था।

इस रेलवे ने लाओस को चीन के साथ बेहतर परिवहन संपर्क और बड़े बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराने की संभावनाएं दी हैं। एक ऐसा देश, जिसकी कोई समुद्री सीमा नहीं है, उसके लिए यह संपर्क व्यापार और आर्थिक विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, इस परियोजना ने चीन के प्रति लाओस की वित्तीय निर्भरता को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं। आलोचक इसे कर्ज के बढ़ते बोझ और भविष्य में नीतिगत विकल्पों पर संभावित दबाव से जोड़ते हैं। दूसरी ओर, इसके समर्थकों का तर्क है कि बेहतर परिवहन संपर्क और व्यापार के अवसर लाओस की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकते हैं।

इसलिए रेलवे परियोजना को केवल कर्ज के जाल के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके आर्थिक लाभ और उससे पैदा होने वाली दीर्घकालिक निर्भरता, दोनों का आकलन जरूरी है।

वियतनाम के सामने रणनीतिक संतुलन की चुनौती

लाओस में चीन की सैन्य मौजूदगी, आर्थिक निवेश और राजनीतिक संपर्कों का विस्तार वियतनाम के लिए नई रणनीतिक चुनौती पेश करता है। हनोई के लिए लाओस केवल पड़ोसी देश नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संबंधों और साझा सुरक्षा हितों वाला महत्वपूर्ण सहयोगी है। यदि लाओस में चीन की सैन्य गतिविधियां भविष्य में और बढ़ती हैं, तो इससे वियतनाम की पश्चिमी सीमा के आसपास सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं। वहीं, चीन के निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से मिलने वाले आर्थिक लाभ लाओस को बीजिंग के साथ संबंध और मजबूत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

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