बेल्जियम में बजट संकट से गिरी सरकार, प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने दिया इस्तीफा

Edited By Updated: 02 Nov, 2026 07:42 PM

belgium prime minister bart de wever resigns but king philippe holds decision

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने बजट पर गठबंधन के सहयोगी दलों से सहमति नहीं बनने के बाद इस्तीफा दे दिया। राजा फिलिप ने अभी इसे स्वीकार नहीं किया है। देश का कर्ज जीडीपी के 110 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़ते ब्याज और रक्षा खर्च ने...

Brussels: बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने लंबे समय से जारी बजट संकट के गहराने के बीच सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया, लेकिन राजा फिलिप ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि वह उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे या नहीं। रूढ़िवादी फ्लेमिश समुदाय के राष्ट्रवादी नेता डी वेवर ने भारी कर्ज से जूझ रहे बेल्जियम की बजट संबंधी समस्याओं से निपटने के संकल्प के साथ पदभार संभाला था, लेकिन वह अपनी योजनाओं के लिए पांच दलों वाली गठबंधन सरकार के अन्य सदस्यों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रहे। बेल्जियम के रॉयल पैलेस ने पुष्टि की कि डी वेवर ने 'अपनी सरकार के भीतर बजट वार्ता विफल होने के बाद' इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रीय सरकारों के गठन की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले राजा ने इसे स्वीकार करने या नहीं करने के बारे में अभी 'फैसला नहीं लिया' है।

 

महल की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ''राजा इस बात पर खेद जताते हैं कि ऐसा कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे देश को एक विश्वसनीय बजट मिल पाता और वह मौजूदा चुनौतियों से निपट पाता।'' यह बयान दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद जारी किया गया। राजा फिलिप मंगलवार से विभिन्न दलों के संसदीय समूहों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद वह शुक्रवार को डी वेवर से महल में फिर मुलाकात करेंगे। फरवरी 2025 में पदभार संभालने वाले डी वेवर अब 31 दिसंबर से पहले 2027 के बजट पर समझौता करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

 

बेल्जियम यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में सबसे अधिक कर्ज वाले देशों में से एक है। फ्रांस और इटली भी इसी श्रेणी में आते हैं। देश पर कर्ज का बोझ कई वर्षों से बढ़ रहा है, लेकिन कोविड महामारी और ऊर्जा संकट ने स्थिति को और खराब कर दिया। यूरोपीय आयोग ने अनुमान जताया है कि इस साल बेल्जियम का कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 110 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। इस कर्ज पर बढ़ता ब्याज भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसा उस समय हो रहा है जब सरकार रक्षा खर्च बढ़ाना चाहती है।  

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