Govatsa Dwadashi Vasu Baras 2026: एक व्रत से चमकेगी संतान की किस्मत! जानें किस समय पूजा करने से मिलेगा पूर्ण फल!

Edited By Updated: 03 Nov, 2026 01:05 AM

govatsa dwadashi vasu baras 2026

Govatsa Dwadashi 2026 Date & Shubh Muhurat: कार्तिक कृष्ण द्वादशी को मनाया जाने वाला गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) का पर्व इस साल 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। जानें पूजन का सटीक शुभ मुहूर्त, संतान की लंबी आयु के लिए पूजा विधि और व्रत के नियम।

Govatsa Dwadashi 2026 Date & Shubh Muhurat: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला गोवत्स द्वादशी पर्व दीपावली उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जो धनतेरस से ठीक एक दिन पहले आता है। इस पर्व को अलग-अलग क्षेत्रों में वसु बारस, बछ बारस और नन्दिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस विशेष दिन महिलाएं अपनी संतान की उन्नति, लंबी उम्र और खुशहाली की कामना के लिए उपवास रखती हैं तथा गौ माता और बछड़े की पूजा-अर्चना करती हैं।

PunjabKesari Govatsa Dwadashi Vasu Baras 2026

धार्मिक महत्व और नियम
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन धन के अधिपति देवता 'वसु' की आराधना की जाती है, इसीलिए इसे वसु बारस कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान को सुखी जीवन और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। इस दिन गौ माता को विश्राम दिया जाता है। इसी वजह से गोवत्स द्वादशी पर गाय के दूध और उससे बनी चीजों (दही, घी आदि) का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है। (उल्लेखनीय है कि भारत के कुछ हिस्सों में इसी प्रकार का बछ बारस पर्व गोवत्स द्वादशी से लगभग दो महीने पहले भी मनाया जाता है।)

गोवत्स द्वादशी 2026 तिथि और समय
वर्ष 2026 में गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) का त्योहार 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को मनाया जाएगा।
द्वादशी तिथि का प्रारंभ: 5 नवंबर 2026 को सुबह 10:35 बजे से।
द्वादशी तिथि का समापन: 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे तक।

PunjabKesari Govatsa Dwadashi Vasu Baras 2026

गोवत्स द्वादशी पूजा का शुभ मुहूर्त 2026
गोवत्स द्वादशी पर प्रदोष काल (शाम के समय) पूजा करने का विशेष विधान है। 
संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त: 5 नवंबर 2026 को शाम 05:33 बजे से रात 08:10 बजे तक रहेगा।

गोवत्स द्वादशी पूजा विधि
कार्तिक कृष्ण बारस के उपलक्ष्य में गोवत्स द्वादशी पर्व मनाया जाएगा। गौवत्स द्वादशी में प्रदोष व्यापिनी तिथि को ग्रहण किया जाता है। गाय-बछड़े की अनुपलब्धता में गीली मिट्टी से बने गौवत्स को पूजा जाता है। गौधूली बेला में गाय व बछड़े का पंचोपचार पूजन कर भिगोई हुई चना दाल, मूंग, मोठ व बाजरे से भोज कराया जाता है। इस व्रत में गेहूं चावल व गाय के दूध का सेवन वर्जित है अतः काकून के चावल से पूजा करके मंत्राक्षत दिया जाता है। इस विशेष पूजन, व्रत व उपाय से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। निसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति होती है तथा संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं।

पूजन हेतु सर्वश्रेष्ठ दिशा ईशान रहेगी। शाम में श्रीकृष्ण संग गौवत्स का पंचोपचार पूजन करें। नारियल तेल का दीपक करें, चंदन से धूप करें, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, लाल चंदन से तिलक करें, काकून के चावल चढ़ाएं तथा भिगोई हुई चना दाल, मूंग, मोठ व बाजरे का भोग लगाएं। पूजन के बाद गाय व बछड़े को भोग खिलाएं। 

विशेष पूजा मंत्र जाप- ॐ श्रीवत्स-कौस्तुभ-धराय नमः॥

PunjabKesari Govatsa Dwadashi Vasu Baras 2026

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!