Edited By Tanuja,Updated: 31 Aug, 2026 06:04 PM

सीरिया की नई सरकार द्वारा उइगर लड़ाकों को सैन्य ढांचे में शामिल करने की रणनीति से चीन चिंतित है। बीजिंग को आशंका है कि इससे चीन विरोधी लड़ाकों को कानूनी पहचान और सैन्य क्षमता मिल सकती है। विश्लेषण के अनुसार, चीन सुरक्षा चिंताओं को सीरिया के निवेश और...
Bejing: दमिश्क में नई सरकार के सामने अब सिर्फ देश को स्थिर करने की चुनौती नहीं है, बल्कि चीन की नाराजगी भी बढ़ती दिख रही है। सीरिया की नई सत्ता में विदेशी लड़ाकों, खासकर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जुड़े उइगर लड़ाकों को सरकारी सैन्य ढांचे में शामिल किए जाने की रणनीति बीजिंग को रास नहीं आ रही है। चीन को आशंका है कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त ये लड़ाके भविष्य में उसके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं। विश्लेषक डॉ. नादिया हेल्मी के अनुसार, सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की रणनीति विदेशी लड़ाकों को खत्म करने के बजाय उन्हें नए सीरियाई राज्य के सैन्य ढांचे में शामिल करने की है। इस रणनीति के तहत विदेशी लड़ाकों को नियमित सैन्य इकाइयों में शामिल कर उन्हें सीरियाई नागरिकता और सरकारी पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
लड़ाकों को लेकर दमिश्क का तर्क
विश्लेषण में 84वीं और 88वीं डिवीजन जैसी इकाइयों का भी उल्लेख किया गया है। दमिश्क का तर्क माना जा रहा है कि इन लड़ाकों को राज्य के नियंत्रण में लाने से वे अलग-अलग सशस्त्र गुटों के रूप में विद्रोह नहीं करेंगे और नई सरकार को आंतरिक स्थिरता हासिल करने में मदद मिलेगी। लेकिन बीजिंग इसे बिल्कुल अलग नजरिए से देखता है। चीन की सबसे बड़ी चिंता उइगर लड़ाकों का भविष्य है। चीन लंबे समय से तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी (TIP) और उससे जुड़े उइगर लड़ाकों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता रहा है।बीजिंग की चिंता यह है कि अगर इन लड़ाकों को सीरियाई सेना का हिस्सा बनाकर कानूनी दर्जा और सरकारी दस्तावेज मिल जाते हैं, तो वे केवल सीरिया तक सीमित नहीं रहेंगे।चीन को आशंका है कि इससे इन लड़ाकों की आवाजाही आसान हो सकती है और भविष्य में वे मध्य एशिया या चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि बीजिंग एकीकरण की नीति के बजाय निरस्त्रीकरण, विघटन और जरूरत पड़ने पर प्रत्यर्पण पर जोर देता दिखाई देता है।
चीन को सता रहा सुरक्षा डर
चीन को डर है कहीं सीरिया नया लॉन्चपैड न बन जाए। इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू चीन की सुरक्षा चिंता है। विश्लेषण के अनुसार, बीजिंग को डर है कि सीरिया में सैन्य रूप से प्रशिक्षित उइगर लड़ाकों का कोई संगठित ढांचा भविष्य में चीन के खिलाफ गतिविधियों का केंद्र बन सकता है। चीन विशेष रूप से इस संभावना को लेकर चिंतित है कि इन लड़ाकों का इस्तेमाल दूसरे क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय शक्तियां चीन के खिलाफ दबाव बनाने के लिए कर सकती हैं। इसमें तुर्किये और अमेरिका जैसे देशों की संभावित भूमिका को लेकर भी चीनी रणनीतिक हलकों में चिंता बताई गई है। उइगर लड़ाकों का मुद्दा अब चीन-सीरिया संबंधों में केवल आतंकवाद या सुरक्षा का विषय नहीं रह गया है। इसके आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव भी पड़ सकते हैं।
विश्लेषण के मुताबिक, चीन सीरिया के पुनर्निर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश और Belt and Road Initiative (BRI) से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सावधानी बरत सकता है। अगर दमिश्क बीजिंग की सुरक्षा चिंताओं को दूर नहीं करता है, तो चीन आर्थिक सहायता और बड़े निवेश को सीमित रखने का विकल्प अपना सकता है। सीरिया लंबे युद्ध के बाद बुरी तरह तबाह हो चुका है और उसे बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की जरूरत है। ऐसे समय में चीन के निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग की अहमियत काफी बढ़ जाती है। यदि बीजिंग वास्तव में पुनर्निर्माण सहायता और निवेश को उइगर लड़ाकों के मुद्दे से जोड़ता है, तो यह अल-शरा सरकार पर आर्थिक दबाव बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
तुर्किये भी बन सकता अहम खिलाड़ी
इस विवाद में तुर्किये की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। तुर्किये के सीरिया में पुराने रणनीतिक हित हैं और उइगर समुदाय के साथ उसके सामाजिक एवं राजनीतिक संबंध भी चर्चा में रहे हैं। इसी कारण बीजिंग क्षेत्रीय स्तर पर तुर्किये जैसे प्रभावशाली देशों के जरिए भी अपनी चिंताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। यदि चीन, तुर्किये और सीरिया के बीच इस मुद्दे पर कोई समझ बनती है, तो इसका असर सीरिया में विदेशी लड़ाकों के भविष्य पर पड़ सकता है। विश्लेषण के अनुसार, बीजिंग की प्राथमिकता विदेशी उइगर लड़ाकों को सीरियाई सेना में स्थायी जगह देने के बजाय उनके सैन्य ढांचे को खत्म करना है। चीन की संभावित मांगों में उनके हथियार छीनना, संगठित सैन्य ढांचे को खत्म करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के हवाले करना या सीरिया से बाहर करना शामिल हो सकता है।
अल-शरा सरकार अभी अंतरराष्ट्रीय मान्यता, आर्थिक पुनर्निर्माण और आंतरिक सुरक्षा जैसी कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में चीन के साथ टकराव उसके लिए महंगा पड़ सकता है। अगर बीजिंग आर्थिक सहयोग धीमा करता है, तो सीरिया के पुनर्निर्माण की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अगर दमिश्क चीन के दबाव में विदेशी लड़ाकों को हटाता है, तो उसे अपने ही सैन्य और राजनीतिक समीकरणों में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।