मिडिल ईस्ट में जंग के कारण कच्चा तेल हुआ बेहद महंगा, अमेरिकी कंपनियों को 60 अरब डॉलर तक फायदा की संभव

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 12:26 PM

crude oil prices soar due to conflict in the middle east u s companies stand

पूरी दुनिया इस वक्त एक गहरे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। 28 फरवरी से ईरान के आसपास शुरू हुए युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक बेहद अहम मार्ग है,...

International Desk: पूरी दुनिया इस वक्त एक गहरे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ी है। 28 फरवरी से ईरान के आसपास शुरू हुए युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक बेहद अहम मार्ग है, वहां हालिया विवाद के कारण सप्लाई में भारी रुकावट आई है। यही मार्ग दुनिया के कई देशों के लिए कच्चे तेल की मुख्य आपूर्ति का साधन है। इस रुकावट का असर सीधे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। ईंधन की बढ़ती कीमतें माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत को भी बढ़ा रही हैं। ऐसे में हर आम व्यक्ति के लिए सब्जी, राशन और अन्य आवश्यक सामान महंगे होने लगे हैं।

अमेरिका की तेल कंपनियों के लिए अवसर
वैश्विक संकट का असर अलग-अलग देशों पर अलग तरह से दिखता है। जहां अधिकांश देश और आम नागरिक इस संकट से परेशान हैं, वहीं अमेरिकी तेल उत्पादक कंपनियों के लिए यह स्थिति एक बड़ा आर्थिक अवसर बन गई है। ईरान से जुड़े इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को झकझोर दिया है, लेकिन अमेरिकी कंपनियां इस मौजूदा परिस्थिति का भरपूर फायदा उठा रही हैं। बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से उनका राजस्व तेजी से बढ़ रहा है और ये कंपनियां इस वैश्विक संकट को वित्तीय लाभ में बदलने में सफल हो रही हैं।


तेल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 47 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। पिछले सप्ताह ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ ने 100 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया। वहीं, अमेरिकी मानक ‘वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट’ (WTI) भी 98.71 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, निवेश बैंक ‘जेफरीज’ का अनुमान है कि केवल मार्च महीने में ही अमेरिकी तेल उत्पादकों को इस मूल्य वृद्धि के कारण लगभग 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त कैश फ्लो मिल सकता है।


60 अरब डॉलर का मुनाफा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2026 के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो अमेरिकी तेल कंपनियों को इस साल लगभग 60 अरब डॉलर से अधिक का अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। रिसर्च फर्म ‘रिस्टैड एनर्जी’ के अनुसार, साल 2026 में कच्चे तेल के औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल रहने पर अमेरिकी उत्पादकों के खजाने में लगभग 63.4 अरब डॉलर की अतिरिक्त नकदी आ सकती है।

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