अमेरिका ने अब चीन पर निकाला गुस्साः सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी कर दी बैन, 40 शिपिंग कंपनियां-तेल टैंकर भी बनाए निशाना

Edited By Updated: 27 Apr, 2026 04:50 PM

us imposes sanctions on china based oil refinery 40 shippers over iranian oil

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से तेल खरीदने के लिए 40 कंपनियों जिनमें चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल भी शामिल है, पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। चीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने हितों की रक्षा करेगा। इससे वैश्विक तनाव और बढ़ गया है।

International Desk: मध्य पूर्व में ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच, अमेरिका ने अब चीन के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने चीन की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी, हेंगली पेट्रोकेमिकल पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके अलावा, लगभग 40 शिपिंग कंपनियों और तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया गया है। अमेरिका का आरोप है कि चीन लगातार ईरान से तेल खरीद रहा था, जबकि अमेरिका ने पहले ही तेहरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखे थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की आय के मुख्य स्रोत तेल निर्यात को पूरी तरह से रोकना है, ताकि उस देश पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके।

 

हेंगली पेट्रोकेमिकल चीन की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जो प्रतिदिन लगभग 400,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करती है। अमेरिका का दावा है कि यह रिफाइनरी लंबे समय से ईरानी तेल का इस्तेमाल कर रही थी, और इसी वजह से इसे सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। इस कार्रवाई के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करता है और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। चीन द्वारा अपनाए गए इस रुख से दोनों देशों के बीच बढ़ रहा टकराव और भी गहरा सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरानी तेल के व्यापार में शामिल किसी भी देश, कंपनी या जहाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 

उन्होंने कहा कि यह कदम मध्य पूर्व में ईरान की आक्रामकता को रोकने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर दबाव डालने के लिए उठाया गया है। यह कार्रवाई उन जहाजों और कंपनियों को भी निशाना बनाती है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे ईरान के तथाकथित "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) का हिस्सा हैं। यह नेटवर्क गुप्त रूप से तेल की खेप भेजने में मदद करता है, जिससे ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए अपने व्यापारिक कार्यों को जारी रख पाता है। कुल मिलाकर, अमेरिका का यह कदम केवल ईरान तक ही सीमित नहीं है; बल्कि इसने अमेरिका-चीन संबंधों में भी तनाव बढ़ा दिया है। इस घटनाक्रम के परिणाम निकट भविष्य में वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीति में स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है। प्रतिक्रिया भेजें

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