मेलबर्न के पेटिंग जू से फैला खतरनाक बैक्टीरिया, दो मासूम अस्पताल में भर्ती; 3 साल के बच्चे को स्थायी ब्रेन डैमेज

Edited By Updated: 18 Aug, 2026 08:53 PM

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ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में एक पेटिंग ज़ू (पालतू जानवरों के चिड़ियाघर) में घूमने गए दो बच्चों के एक बेहद खतरनाक बैक्टीरिया की चपेट में आने का गंभीर मामला सामने आया है। संक्रमण के कारण दोनों बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं और विक्टोरिया के स्वास्थ्य...

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में एक पेटिंग ज़ू (पालतू जानवरों के चिड़ियाघर) में घूमने गए दो बच्चों के एक बेहद खतरनाक बैक्टीरिया की चपेट में आने का गंभीर मामला सामने आया है। संक्रमण के कारण दोनों बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं और विक्टोरिया के स्वास्थ्य विभाग ने इस फैलते संक्रमण की जांच शुरू कर दी है।

मस्तिष्क और किडनी को पहुंचा गंभीर नुकसान
रिपोर्ट्स के अनुसार, संक्रमित बच्चों में से एक तीन वर्षीय बच्चे के मस्तिष्क को स्थायी नुकसान (परमानेंट ब्रेन डैमेज) हुआ है और उसकी किडनी फेल हो गई है, जिसके कारण उसे भविष्य में किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है। इस बच्चे का इलाज पिछले चार हफ्तों से मोनाश चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में चल रहा है।

वहीं, इसी चिड़ियाघर में गया एक अन्य दो वर्षीय बच्चा 'नूह' (Noah) भी गंभीर रूप से बीमार हो गया, जिसे तीन हफ्तों तक आईसीयू (सघन चिकित्सा कक्ष) में रहना पड़ा। नूह की मां ब्रुक स्नूक्स ने बताया कि बच्चे में शुरुआत में सामान्य दस्त और पेट खराब होने के लक्षण दिखाई दिए थे, जिससे बीमारी की गंभीरता का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल था।

क्या है शिगा टॉक्सिन (STEC) और यह कैसे फैलता है?
जांचकर्ताओं के अनुसार, बच्चे 'शिगा टॉक्सिन-उत्पादक एशचेरिचिया कोलाई' (STEC) संक्रमण का शिकार हुए हैं, जो पेट और किडनी की गंभीर समस्याओं का कारण बनता है। सीडीसी (CDC) के अनुसार, यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से गायों जैसे जानवरों की आंत और मल में पाया जाता है और सालाना इसके 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं।

इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में दस्त, पेट में मरोड़, मतली और उल्टी शामिल हैं, जो संक्रमण के 3-4 दिन बाद दिखाई देते हैं। यह संक्रमण जानवरों के सीधे संपर्क में आने, दूषित पानी में तैरने या दूषित भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से फैल सकता है। बच्चे इस बैक्टीरिया को तीन सप्ताह तक और वयस्क लगभग एक सप्ताह तक अपने शरीर में संक्रामक रख सकते हैं।

बचाव के लिए कोई टीका नहीं, स्वास्थ्य अधिकारी की चेतावनी
चिकित्सकों के अनुसार, STEC संक्रमण के कारण हीमोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम (HUS) नामक जानलेवा स्थिति बन सकती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं और किडनी को गंभीर नुकसान पहुँचाती है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह बीमारी होना आम है और इसके बचाव के लिए कोई टीका (वैक्सीन) उपलब्ध नहीं है।

मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी कैरोलीन मैकएल्ने ने माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका अच्छी हैंड हाइजीन (हाथों की स्वच्छता) है। बच्चों को शौचालय का उपयोग करने के बाद और जानवरों के संपर्क में आने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धोने की आदत डालनी चाहिए ताकि वे इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रह सकें।

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