Edited By Tanuja,Updated: 18 Jun, 2026 05:39 PM

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की एक सोशल मीडिया पोस्ट विवादों में आ गई। उन्होंने जिनेवा में 19 जून को हस्ताक्षर समारोह होने का दावा किया, लेकिन बाद में पोस्ट को चुपचाप संपादित कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया कि...
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौते के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। शहबाज शरीफ ने शुरुआत में दावा किया था कि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट को संपादित कर यह जानकारी हटा दी।
क्या लिखा था शहबाज शरीफ ने?
समझौते की घोषणा के बाद शरीफ ने सोशल मीडिया पर एक लंबा संदेश साझा किया। इसमें उन्होंने लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं तथा 19 जून को जिनेवा में एक औपचारिक हस्ताक्षर समारोह आयोजित होगा। हालांकि कुछ समय बाद पोस्ट को संपादित कर दिया गया और जिनेवा में होने वाले कथित हस्ताक्षर समारोह का उल्लेख हटा दिया गया।
ईरान ने किया स्पष्ट
विवाद तब बढ़ गया जब ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि समझौते पर पहले ही डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिनेवा में किसी प्रकार का औपचारिक हस्ताक्षर समारोह नहीं होगा। हालांकि दोनों देशों की वार्ता टीमें आगे की बातचीत और समझौते के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए जिनेवा में मुलाकात कर सकती हैं।
मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता प्रक्रिया में पाकिस्तान ने सक्रिय भूमिका निभाने का प्रयास किया था। इस प्रक्रिया में कतर, मिस्र और तुर्की जैसे देशों ने भी मध्यस्थता और संवाद को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए विभिन्न कूटनीतिक प्रयास किए थे। इसी वजह से समझौते के बाद इस्लामाबाद में इसे एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश भी दिखाई दी।
आलोचना का कारण क्या बना?
विश्लेषकों का मानना है कि जिनेवा में हस्ताक्षर समारोह की जानकारी समय से पहले या अपुष्ट आधार पर सार्वजनिक कर दिए जाने के कारण पाकिस्तान सरकार आलोचना का सामना कर रही है। ईरान की आधिकारिक सफाई के बाद सोशल मीडिया पर शहबाज शरीफ की पोस्ट में किए गए बदलाव को लेकर सवाल उठने लगे।अब यह मामला पाकिस्तान की कूटनीतिक तैयारी और सूचना प्रबंधन पर बहस का विषय बन गया है।