दुनिया के तनाव में भारत पर बढ़ा भरोसा, यूरोप-कनाडा के लिए बना अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार

Edited By Updated: 14 Feb, 2026 03:04 PM

how india is helping europe and canada de risk their economies

अमेरिका-चीन-रूस तनाव के बीच यूरोप और कनाडा अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षित करने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और EU-India FTA ने भारत को “तीसरा रणनीतिक स्तंभ” बना दिया है, जिससे पश्चिमी देशों को चीन और अमेरिकी अनिश्चितता...

 International Desk: तेजी से बदलते वैश्विक हालात में भारत यूरोप और कनाडा के लिए एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच बढ़ती टकरावपूर्ण राजनीति ने ब्रसेल्स और ओटावा को मजबूर कर दिया है कि वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं को “डी-रिस्क” करने के लिए भारत के साथ रिश्ते और गहरे करें। हाल ही में Donald Trump और Narendra Modi के बीच हुए बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते ने अमेरिका-भारत संबंधों में आई गिरावट को थामने का काम किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई, जबकि भारत ने अमेरिकी निर्यात पर शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं कम करने का वादा किया।

 

हालांकि ट्रंप ने इस डील को भू-राजनीतिक रंग देते हुए दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से ऊर्जा खरीदेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दावे की न तो पुष्टि की और न ही खंडन। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुप्पी रणनीतिक थी, क्योंकि भारत किसी बड़े ऊर्जा पुनर्संयोजन में खुद को बांधना नहीं चाहता।इस डील का समय भी बेहद अहम है। इसके ठीक पहले भारत और European Union के बीच 25 साल से अटके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनी। इस समझौते से दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक ब्लॉकों में से एक का निर्माण होगा। माना जा रहा है कि यह सफलता भारत-EU उत्साह से ज्यादा ट्रंप के टैरिफ दबाव और यूरोप के साथ उनके टकरावपूर्ण रवैये का नतीजा थी।

 

यूरोप आज दुविधा में है। एक ओर अमेरिका की अनिश्चित नीतियां और टैरिफ धमकियां हैं, तो दूसरी ओर China के साथ बढ़ते रिश्तों से जुड़ी सुरक्षा और मानवाधिकार संबंधी चिंताएं। यूरोपीय नेता चीन से व्यापार बढ़ाने को लेकर घरेलू आलोचना झेल रहे हैं, जहां उन्हें मुनाफे के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौते का आरोपी ठहराया जा रहा है। इसी बीच, यूरोप ने भारत को एक “तीसरे विकल्प” के रूप में देखना शुरू किया है ऐसा विकल्प जो चीन जैसी राजनीतिक बोझिलता के बिना विशाल बाजार और उत्पादन क्षमता देता है।

 

यही सोच कनाडा में भी दिख रही है। प्रधानमंत्री Mark Carney के नेतृत्व में कनाडा अपनी रणनीति को विविध बना रहा है, ताकि वह वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संतुलन बना सके। भारत के साथ बढ़ते रिश्ते इस नई नीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब न सिर्फ एक उभरती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार भी है जो यूरोप और कनाडा को वैश्विक अस्थिरता के दौर में आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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