Edited By Pardeep,Updated: 04 Jan, 2026 06:09 AM

निकोलस मादुरो के सत्ता से हटने के बाद वेनेजुएला का भविष्य क्या होगा, इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और विवादित बयान दिया है। ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और रूस-चीन जैसे देशों के नाराज़ होने की...
इंटरनेशनल डेस्कः निकोलस मादुरो के सत्ता से हटने के बाद वेनेजुएला का भविष्य क्या होगा, इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और विवादित बयान दिया है। ट्रंप के इस ऐलान के बाद दुनिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और रूस-चीन जैसे देशों के नाराज़ होने की आशंका भी जताई जा रही है।
ट्रंप ने बताया वेनेजुएला का भविष्य
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मादुरो के हटने के बाद फिलहाल वेनेजुएला का प्रशासन अमेरिका अपने हाथ में लेगा। उन्होंने साफ कहा कि जब तक वहां “सुरक्षित, स्थिर और सही” तरीके से सत्ता का हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका ही देश को चलाएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इस प्रक्रिया की कोई तय समयसीमा नहीं है।
ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है और अब अमेरिका इन तेल संसाधनों का दोहन करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका न सिर्फ खुद इस तेल का इस्तेमाल करेगा, बल्कि इसे बड़े पैमाने पर दूसरे देशों को भी बेचेगा। इस बयान को वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी ऑपरेशन पर ट्रंप के दावे
ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला पर हुई कार्रवाई में कुछ अमेरिकी सैनिक घायल जरूर हुए हैं, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला की सेना अमेरिकी कार्रवाई के लिए तैयार थी, लेकिन पूरी तरह से हार गई। उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि वहां फिर से कोई ऐसा शासक आए, जिससे हालात पहले जैसे ही खराब हो जाएं। इसलिए हम खुद देश का संचालन करेंगे।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि मादुरो की गिरफ्तारी बेहद गोपनीय तरीके से अंधेरे में की गई। उनके मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान काराकास की ज्यादातर लाइटें बंद थीं, चारों तरफ अंधेरा था और हालात बेहद खतरनाक थे। उन्होंने कहा, “दुनिया का कोई भी देश वो नहीं कर सकता, जो अमेरिका ने किया है।”
ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई का दावा
ट्रंप ने इस मौके पर ड्रग तस्करी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने समुद्र के रास्ते आने वाली करीब 97 फीसदी नशीली दवाओं को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि एक-एक ड्रग बोट औसतन 25 हजार लोगों की मौत का कारण बनती है और मादुरो शासन के दौरान ड्रग तस्करी को बढ़ावा मिला।
रूस ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा की
वेनेजुएला में अमेरिकी हमलों को लेकर रूस, चीन और ईरान समेत कई देशों ने नाराज़गी जताई है। रूस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों को सही ठहराने के बहाने बेकार हैं। रूस ने बयान में कहा कि विचारधारात्मक दुश्मनी ने व्यावहारिक सोच और भरोसे पर आधारित रिश्तों को नुकसान पहुंचाया है। रूस का कहना है कि लैटिन अमेरिका को शांतिपूर्ण क्षेत्र बने रहना चाहिए और वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी दखल के अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार मिलना चाहिए।
अमेरिकी कदम से चीन की क्यों बढ़ी मुश्किलें?
ट्रंप के ऐलान के बाद चीन की चिंता भी बढ़ गई है। चीन लंबे समय से वेनेजुएला के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल रहा है और उसने वेनेजुएला को भारी कर्ज भी दे रखा है। अब अगर वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का नियंत्रण होता है, तो इससे चीन के ऊर्जा हितों और निवेश पर बड़ा असर पड़ सकता है।
चीन ने भी अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से स्तब्ध हैं। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका व कैरेबियन क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।” चीन ने अमेरिका से अपील की कि वह दूसरे देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान करे। कुल मिलाकर, मादुरो के बाद वेनेजुएला का भविष्य सिर्फ उसी देश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मुद्दा अब वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अमेरिका-रूस-चीन के रिश्तों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला बन गया है।