Edited By Tanuja,Updated: 14 Mar, 2026 07:13 PM

ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि भारत को होर्मुज से तेल-गैस आपूर्ति मिलती रहेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर अमेरिका और इजरायल पर दबाव डालकर युद्ध रोकने...
International Desk: मिडल ईस्ट व पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने भारत की संभावित कूटनीतिक भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल और गैस की आपूर्ति मिलती रहेगी, लेकिन इस संकट का असली समाधान युद्ध को खत्म करने में है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ चर्चाएं हुई हैं और उन्हें भरोसा है कि भारत को तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों का लाभ मिलता रहेगा। इलाही के मुताबिक, भारत जैसे बड़े देश को वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर युद्ध रोकने के प्रयास करने चाहिए।
PM Modi is most likely to Mediate for a peace deal!
On Iran allowing Indian ships to sail freely and bring energy products from the Strait of Hormuz, Representative of Iran's Supreme Leader in India, Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi, says: "Actually, there have been some discussions… pic.twitter.com/i8k4iOXikV
— Major Sammer Pal Toorr (Infantry Combat Veteran) (@samartoor3086) March 13, 2026
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यस्थता करके जंग रुकवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू को मनाने की क्षमता है। इलाही ने कहा कि भारतीय PM के साथ दुनिया के नेताओं को एकजुट होकर अमेरिका जाना चाहिए और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समझाना चाहिए कि यह युद्ध निर्दोष नागरिकों के खिलाफ अन्यायपूर्ण है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल पर भी युद्ध रोकने के लिए दबाव डाला जाना चाहिए। ईरानी प्रतिनिधि ने अपने बयान में कहा कि ईरान ने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की। उनके शब्दों में,“हमने यह युद्ध नहीं बनाया, हमने इसे शुरू नहीं किया। लेकिन हम अपनी गरिमा नहीं बेचेंगे। जरूरत पड़ी तो हम अपनी जमीन पर अपना खून बहाने के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर वैश्विक नेता और बड़े देश आगे आएं तो कूटनीतिक बातचीत के जरिए शांति समझौता संभव हो सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने यह उम्मीद जताई कि भारत और उसके नेता इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है, इसलिए क्षेत्र में शांति और सुरक्षित समुद्री मार्ग भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों के साथ संबंध होने के कारण नई दिल्ली संभावित रूप से संवाद और मध्यस्थता में भूमिका निभा सकता है, हालांकि इस बारे में भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।