Edited By Tanuja,Updated: 15 Feb, 2026 06:55 PM

चीन द्वारा उइगर समुदाय पर बढ़ते दमन के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अमेरिका में राजनीतिक, कानूनी और कूटनीतिक मंचों पर चीन की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने जवाबदेही की मांग तेज कर...
Bejing: चीन द्वारा उइगर मुस्लिम समुदाय पर किए जा रहे दमन के खिलाफ वैश्विक स्तर पर विरोध और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने अपने साप्ताहिक ब्रीफ में बताया कि एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में राजनीतिक, कानूनी और कूटनीतिक मोर्चों पर चीन की नीतियों को चुनौती दी जा रही है।
जापान में राजनीतिक समर्थन
जापान में प्रधानमंत्री साने ताकाइची और उनकी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की संसदीय जीत का वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने स्वागत किया है। ताकाइची पहले भी उइगर प्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुकी हैं और इस मुद्दे पर संसदीय स्तर पर समर्थन जताती रही हैं। इसके साथ ही उइगर मूल की सांसद एरी अरफिया के दोबारा चुने जाने को भी लोकतंत्र और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सकारात्मक संकेत बताया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में कानूनी चुनौती
ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलियन उइगर तंगरिताग महिला संघ ने फेडरल कोर्ट ऑफ ऑस्ट्रेलिया में याचिका दायर कर रिटेल कंपनी Kmart Australia से उन सप्लायर्स की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है, जिनका संबंध कथित तौर पर चीन के उइगर क्षेत्र में जबरन श्रम से है। यह मामला ऑस्ट्रेलिया में आधुनिक दासता कानूनों को और सख्त करने की बहस के बीच सामने आया है।
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चीन की आलोचना
जिनेवा में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर उइगर अधिकार कार्यकर्ता ज़ुमरताय अर्किन ने कहा कि चीन का दमन अब अस्थायी अभियान नहीं बल्कि एक संस्थागत प्रणाली बन चुका है। उन्होंने परिवारों की जबरन जुदाई, श्रम स्थानांतरण और उइगर महिलाओं को निशाना बनाने की नीतियों पर चिंता जताई और सरकारों को बिना जवाबदेही के चीन से रिश्ते बहाल न करने की चेतावनी दी।
अमेरिका और लैटिन अमेरिका में आवाज
मेक्सिको में आयोजित कार्यक्रम में उइगर कार्यकर्ता रुशन अब्बास ने कहा कि चीन की जबरन श्रम नीतियों का असर वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच रहा है। उन्होंने अपनी बहन गुलशन अब्बास की कैद का हवाला देते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार नहीं, बल्कि इंसानी पीड़ा से जुड़ा है।
म्यूनिख और हांगकांग में बढ़ी चिंता
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन से पहले यूरोपीय देशों में चीन से संबंधों पर पुनर्विचार की चर्चा तेज है। वहीं हांगकांग में मीडिया उद्यमी जिमी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत लंबी सजा दिए जाने के बाद नागरिक स्वतंत्रताओं के सिमटने पर गंभीर चिंता जताई जा रही है। अधिकार समूहों का कहना है कि यह कार्रवाई चीन की दमनकारी पहुंच के विस्तार का संकेत है।