Edited By Pardeep,Updated: 07 Feb, 2026 09:53 PM

मेरिका ने पहली बार खुलकर आरोप लगाया है कि चीन ने जून 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। यह वही समय था जब भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी और पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी।
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका ने पहली बार खुलकर आरोप लगाया है कि चीन ने जून 2020 में गुप्त परमाणु परीक्षण किया था। यह वही समय था जब भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी और पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी।
यह दावा अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस डिनैनो ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन में किया। खास बात यह है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब 5 फरवरी को अमेरिका-रूस की आखिरी परमाणु संधि खत्म हो चुकी है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी नई परमाणु संधि में चीन को शामिल करना चाहते हैं।
कब हुआ था कथित टेस्ट?
डिनैनो के मुताबिक, 22 जून 2020 को चीन ने यह गुप्त परमाणु परीक्षण किया। यह तारीख इसलिए बेहद अहम है क्योंकि यह गलवान झड़प के ठीक 7 दिन बाद की है। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच खूनी टकराव हुआ था। उस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने अपने नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा कभी नहीं बताया, लेकिन कई रिपोर्टों में कहा गया कि चीन को भारत से ज्यादा नुकसान हुआ था। यह सैन्य तनाव 2024 में दोनों देशों के बीच नए समझौते के बाद कुछ हद तक शांत हुआ।

कहां हुआ था टेस्ट?
अमेरिका का दावा है कि चीन ने यह परीक्षण शिनजियांग के लोप नूर परमाणु साइट पर किया, जो भारत की सीमा के करीब है। अमेरिका का कहना है कि चीन ने इसे छुपाने के लिए “डी-कपलिंग तकनीक” का इस्तेमाल किया।
डी-कपलिंग क्या है?
इस तकनीक में परमाणु विस्फोट को बहुत गहरी भूमिगत गुफा (कैविटी) में किया जाता है ताकि जमीन के झटके (भूकंपीय तरंगें) कमजोर पड़ जाएं और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियां इसे पकड़ न पाएं। यह तरीका पहले भी परमाणु परीक्षण छुपाने के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है।
अमेरिका क्यों चिंतित है?
अमेरिका लंबे समय से चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियार भंडार को लेकर चिंतित है। माना जाता है कि चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार हैं। वह इन्हें तेजी से बढ़ा रहा है। पिछले साल ट्रंप ने आरोप लगाया था कि चीन और पाकिस्तान गुप्त परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। इसी वजह से ट्रंप चाहते हैं कि भविष्य की किसी भी परमाणु संधि में चीन भी शामिल हो।
क्या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कुछ पकड़ा?
यहां मामला और विवादित हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था CTBTO (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty Organization) ने कहा कि उस दौरान चीन में किसी भी परमाणु परीक्षण का पता नहीं चला। यानी अमेरिका के दावे और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के बीच टकराव है।
चीन ने क्या कहा?
चीन के परमाणु राजदूत शेन जियान ने सीधे तौर पर आरोप न स्वीकार किया न ही पूरी तरह खारिज किया। लेकिन उन्होंने कहा अमेरिका बार-बार चीन को परमाणु खतरे के रूप में बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। असली हथियारों की दौड़ बढ़ाने वाला अमेरिका है, चीन नहीं।
गलवान से जोड़कर क्यों देखा जा रहा है मामला?
भले ही अमेरिका ने सीधे तौर पर इस टेस्ट को गलवान से नहीं जोड़ा, लेकिन समय बेहद संवेदनशील था क्योंकि LAC पर भारी सेना तैनात थी। भारत और चीन आमने-सामने थे। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं और पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति थी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने शायद पहले से इस टेस्ट की तैयारी कर रखी थी और गलवान तनाव की आड़ में इसे अंजाम दिया।