शादी की अजीब परंपरा! यहां दहेज में कार-जेवर नहीं बल्कि दिया जाता है Portable Toilet, जानें वजह?

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 04:16 PM

in china the bride is given a portable toilet as dowry

दुनिया भर में शादियों के दौरान दहेज (Dowry) के रूप में सोने-चांदी, नकदी या महंगी गाड़ियों का चलन आम है लेकिन चीन के एक खास समुदाय में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां दुल्हन को विदा करते समय दहेज के तौर पर एक...

China Marriage Traditions : दुनिया भर में शादियों के दौरान दहेज (Dowry) के रूप में सोने-चांदी, नकदी या महंगी गाड़ियों का चलन आम है लेकिन चीन के एक खास समुदाय में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा है जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां दुल्हन को विदा करते समय दहेज के तौर पर एक 'पोर्टेबल टॉयलेट' (Portable Toilet) दिया जाता है।

किस समुदाय में है यह रिवाज?

यह अनोखी परंपरा चीन के हान (Han) समुदाय में प्रचलित है। पूर्वी चीन के जिआंगसू और झेजियांग प्रांतों में इसे आज भी सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जाता है। हालांकि आधुनिकता के दौर में अब यह रिवाज कम हो गया है लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसे आज भी बहुत सम्मान के साथ निभाया जाता है।

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गंदगी नहीं, बल्कि शुभ माना जाता है यह पॉट

सुनने में भले ही यह अजीब लगे लेकिन हान समुदाय के लिए यह पॉट गंदगी का नहीं बल्कि जीवन की स्थिरता और कुशलता का प्रतीक है। जब दुल्हन की पालकी दूल्हे के घर पहुंचती है तो इस टॉयलेट को खाली नहीं रखा जाता। इसमें उबले हुए अंडे, खजूर, मूंगफली और सूखे मेवे भरे जाते हैं। यांगझोउ जैसे इलाकों में तांबे के बने इन पॉट्स को लाल रिबन से सजाया जाता है। इसके अंदर रखे गए मेवों और अंडों को बाद में दूल्हा-दुल्हन के बिस्तर पर फैला दिया जाता है जो खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

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क्यों शुरू हुई यह परंपरा?

पुराने समय में चीन के घरों में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम या टॉयलेट नहीं होते थे।

  • सुरक्षा और सुविधा: महिलाओं को रात के समय घर से बाहर न जाना पड़े, इसलिए माता-पिता अपनी बेटी को यह पॉट उपहार में देते थे।

  • खेती में उपयोग: उस समय इसमें जमा हुए कचरे को खेतों में खाद (Manure) के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

  • अंधविश्वास: कुछ इलाकों में एक छोटे बच्चे से इस पॉट में पेशाब कराया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से दुल्हन को भविष्य में पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

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आधुनिकता के साथ बदलता स्वरूप

1980 के दशक के बाद जब चीन के गांवों में भी आधुनिक फ्लश टॉयलेट और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम पहुंच गए तो इस परंपरा का महत्व कम होने लगा। अब यह महज एक प्रतीकात्मक रिवाज बनकर रह गया है जिसे बुजुर्ग पीढ़ी अपनी संस्कृति को याद रखने के लिए निभाती है।

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