100, 200 और 500 के नोटों पर क्यों छापी जाती बापू गांधी की तस्वीर? जवाब जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान!

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 01:03 PM

whose image was on indian notes before 1996

भारत के नोटों पर बापू गांधी की तस्वीर छपी रहती है। इस तस्वीर के पीछे भी एक इंट्रेस्टिंग कहानी है। क्या आप जानते हैं कि हमेशा से ऐसा नहीं था? एक दौर वह भी था जब भारतीय जेबों में अंग्रेजी राजाओं की तस्वीरें वाले नोट हुआ करते थे। आइए, भारतीय करेंसी के...

नेशनल डेस्क: भारत के नोटों पर बापू गांधी की तस्वीर छपी रहती है। इस तस्वीर के पीछे भी एक इंट्रेस्टिंग कहानी है। क्या आप जानते हैं कि हमेशा से ऐसा नहीं था? एक दौर वह भी था जब भारतीय जेबों में अंग्रेजी राजाओं की तस्वीरें वाले नोट हुआ करते थे। आइए, भारतीय करेंसी के इस दिलचस्प सफर पर एक नज़र डालते हैं।

ब्रिटिश दौर में नोटों पर छपती थी 'किंग' की तस्वीर

आजादी से पहले, भारतीय नोटों पर ब्रिटिश राजशाही का दबदबा था। सबसे पहले किंग जॉर्ज पंचम (King George V) की तस्वीर नोटों पर छपी थी। उनके बाद किंग जॉर्ज षष्ठम (King George VI) के चित्र वाले नोट चलन में आए। ये नोट ब्रिटेन में ही छपते थे और वहां से भारत भेजे जाते थे।

आजादी के बाद उठा सवाल

1947 में जब देश आजाद हुआ, तो सवाल उठा कि नोटों पर किसकी तस्वीर हो? उस समय सरकार ने तय किया कि किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे राष्ट्र की पहचान को प्राथमिकता दी जाए। इसी सोच के साथ 1949 में पहली बार 1 रुपये के नए नोट से किंग जॉर्ज की फोटो हटाकर अशोक स्तंभ (Lion Capital) को जगह दी गई। इसके बाद कई दशकों तक नोटों पर खेती, प्रगति (ट्रैक्टर, बांध) और विज्ञान (आर्यभट्ट उपग्रह) के चित्र दिखाई देते रहे।

गांधी जी की एंट्री: 1969 से 1996 का सफर

  • 1969: बापू की 100वीं जन्म शताब्दी के अवसर पर पहली बार एक 'स्मारक नोट' जारी किया गया, जिसमें गांधी जी सेवाग्राम आश्रम के बाहर बैठे नजर आए।
  • 1987: 500 रुपये के नए नोट पर पहली बार गांधी जी की वही मुस्कुराती हुई तस्वीर छपी जो आज हम देखते हैं।
  • 1996: यह साल टर्निंग पॉइंट रहा। RBI ने आधिकारिक तौर पर 'महात्मा गांधी सीरीज' शुरू की और सभी नोटों पर बापू का चेहरा अनिवार्य कर दिया गया।

बापू को ही क्यों चुना गया?

RBI के अनुसार, महात्मा गांधी का चेहरा न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति का प्रतीक है, बल्कि इसे जालसाजी (Counterfeiting) से बचाने के लिए भी सबसे सुरक्षित माना गया। इंसानी चेहरे की बारीक रेखाओं की नकल करना बेजान चीजों की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होता है।

 

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