Edited By Radhika,Updated: 31 Mar, 2026 04:58 PM

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने UAE में स्थित अल मिन्हाद बेस के पास एक "गुप्त अमेरिकी सैन्य कमांड सेंटर" को ड्रोन हमले में नष्ट कर दिया है। ईरानी नौसेना के अनुसार, इस हमले के वक्त वहां लगभग 200 अमेरिकी अधिकारी और...
ईरान-अमेरिका युद्ध: UAE में अमेरिकी 'सीक्रेट कमांड सेंटर' पर ड्रोन हमला, 200 अधिकारियों के मौजूद होने का दावा
इंटरनेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने UAE में स्थित अल मिन्हाद बेस के पास एक "गुप्त अमेरिकी सैन्य कमांड सेंटर" को ड्रोन हमले में नष्ट कर दिया है। ईरानी नौसेना के अनुसार, इस हमले के वक्त वहां लगभग 200 अमेरिकी अधिकारी और कमांडर एक उच्च स्तरीय बैठक के लिए मौजूद थे।
ईरान का बड़ा प्रहार
ईरान ने अपने बयान में कहा है कि उनके खुफिया तंत्र ने अमेरिकी 'फिफ्थ फ्लीट' के कमांडरों के अस्थायी ठिकाने की पहचान की और ठीक उसी समय सटीक ड्रोन स्ट्राइक की, जब वहां बैठक चल रही थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी ठिकाने अब वरिष्ठ सैन्य कर्मियों के लिए "असुरक्षित" हैं। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका और इजरायल के हमले
यह कार्रवाई उन हवाई हमलों के कुछ घंटों बाद हुई है, जिनमें अमेरिका और इजरायल ने मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों और उत्तर-पश्चिम में एक प्रमुख धार्मिक स्थल 'ग्रैंड हुसेनिया' को निशाना बनाया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान के इस्फहान और तेहरान के कई हिस्सों में धमाके और बिजली गुल होने की खबरें हैं।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव और तेल की कीमतें
ट्रंप के इस बयान के बाद कि वे ईरान के तेल कुओं और पावर सिस्टम को तबाह कर देंगे, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों के बाद यरूशलेम और तेल अवीव में सायरन गूंज रहे हैं। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पास भी ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए हैं। ईरान ने पलटवार करते हुए हॉर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स लगाने और अमेरिकी व इजरायली जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप इस युद्ध को जल्द समाप्त करना चाहते हैं, भले ही हॉर्मुज का रास्ता पूरी तरह न खुले। लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।