Edited By Pardeep,Updated: 31 Aug, 2026 06:22 AM

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार को जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल अजराक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है। यह हमला हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है।
तेहरान/अम्मान: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सोमवार को जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल अजराक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया है। यह हमला हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पहले ही सचेत किया था कि लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का जवाब "ईरान के बेटों" द्वारा दिया जाएगा और हमलावर को इसकी कड़ी सजा भुगतनी होगी।
अमेरिकी हमले में नागरिकों सहित कई हताहत, भुगतनी होगी आर्थिक और सैन्य कीमत
ईरानी राज्य प्रसारक IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले में कई ईरानी कर्मचारी और नागरिक मारे गए तथा घायल हुए थे। इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिका को लारक द्वीप पर किए गए इस हमले की भारी कीमत आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ेगी।
क्यों बेहद खास और महत्वपूर्ण है लारक द्वीप?
लारक द्वीप का सैन्य रूप से ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रहा है, क्योंकि यहां ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना का बेस स्थापित है। इसके साथ ही, यह द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मुख्य शिपिंग मार्गों पर सीधे नजर रखने की भौगोलिक स्थिति में है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार भी इस द्वीप पर विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठान और मिसाइल साइटें सक्रिय रही हैं। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद संवेदनशील रास्ता है, जहां से वर्तमान संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) शिपमेंट का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता था।