Edited By Pardeep,Updated: 06 Mar, 2026 12:58 AM

मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि अगर इन देशों को ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना है तो उन्हें अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों को तुरंत हटाना होगा।
इंटरनेशनल डेस्कः मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि अगर इन देशों को ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना है तो उन्हें अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों को तुरंत हटाना होगा।
ईरानी अखबार तेहरान टाइम्स के मुताबिक, ईरान की संसद के एक सांसद ने कहा कि अगर संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, बहरीन और तुर्की जैसे देश ईरानी मिसाइलों से बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्रों से सभी अमेरिकी सैनिकों को बाहर करना होगा और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करना होगा।
युद्ध का छठा दिन, लगातार हमले
अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद यह संघर्ष अब छठे दिन में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों पक्षों की तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं।
इसके जवाब में ईरान भी लगातार मिसाइल हमले कर रहा है। ईरान ने इजरायल के शहर तेल अवीव समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में मौजूद कुछ अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
युद्ध में बढ़ रही मौतों की संख्या
ईरान की संस्था Foundation of Martyrs and Veterans Affairs के अनुसार इस युद्ध में अब तक कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल ने भी गुरुवार को नए हमलों की चेतावनी दी है। इजरायल का कहना है कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर भी कार्रवाई की है।
श्रीलंका के पास जहाज पर हमले का आरोप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि बुधवार को अमेरिका ने श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हमला किया।
उनका दावा है कि इस हमले में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। उन्होंने इस घटना को “समुद्र में हुआ अत्याचार” बताया। जानकारी के मुताबिक यह जहाज भारतीय नौसेना के निमंत्रण पर आया था और इसमें लगभग 130 चालक दल के सदस्य मौजूद थे।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण की चेतावनी
इसी बीच ईरान की सैन्य इकाई IRGC ने दावा किया कि उसने खाड़ी के उत्तरी हिस्से में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे उसमें आग लग गई।
IRGC ने यह भी कहा कि युद्ध की स्थिति में Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों का रास्ता ईरान के नियंत्रण में रहेगा। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
अमेरिका में भी बढ़ा राजनीतिक विवाद
इस युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। Washington, D.C. में अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन सांसदों ने उस प्रस्ताव को रोक दिया जिसमें ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों को रोकने और किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करने की मांग की गई थी।