US-Iran WAR : इजराइल ईरान युद्ध से भारतीय टूरिज्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका, 60,000 से ज्यादा बुकिंग रद्द

Edited By Updated: 03 Mar, 2026 08:55 PM

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मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात खासकर ईरान और इजरायल के बीच टकराव तथा अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर भारत के ट्रैवल और टूरिज़्म उद्योग पर पड़ रहा है।

नेशनल डेस्कः मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात खासकर ईरान और इजरायल के बीच टकराव तथा अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर भारत के ट्रैवल और टूरिज़्म उद्योग पर पड़ रहा है। हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दी हैं, जिससे ट्रैवल कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

60,000 से ज्यादा बुकिंग रद्द

प्रमुख ट्रैवल कंपनी STIC ट्रैवल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष गोयल ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद भारत से मध्य पूर्व और मध्य एशिया के देशों के लिए की गई करीब 50,000 से 60,000 बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। उनका कहना है कि आने वाले एक महीने में तो लगभग 100 प्रतिशत टूर और ट्रैवल बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। यानी फिलहाल उस क्षेत्र के लिए नई यात्राएं लगभग ठप हो गई हैं।

पहले हर दिन जाते थे 30-40 हजार यात्री

युद्ध से पहले की स्थिति पर नजर डालें तो भारत से हर दिन करीब 30,000 से 40,000 लोग मध्य एशिया और मध्य पूर्व के देशों की यात्रा करते थे इनमें से लगभग 15,000 लोग पर्यटक होते थे। लेकिन मौजूदा हालात के कारण लोगों ने अपनी यात्राएं टाल दी हैं या पूरी तरह रद्द कर दी हैं।

60,000 से ज्यादा भारतीय फंसे होने की आशंका

अनुमान लगाया जा रहा है कि इस समय मध्य पूर्व और मध्य एशिया के देशों में 60,000 से ज्यादा भारतीय पर्यटक मौजूद हैं। अगर संघर्ष और बढ़ता है तो इनकी वापसी और सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।

हर साल 1.4 करोड़ भारतीय करते हैं यात्रा

आंकड़ों के मुताबिक हर साल लगभग 1 करोड़ 40 लाख (14 मिलियन) भारतीय नागरिक मध्य एशिया और मध्य पूर्व के देशों की यात्रा करते हैं। ऐसे में मौजूदा युद्ध जैसे हालात लंबे समय तक बने रहे तो भारत के ट्रैवल और टूरिज़्म सेक्टर को बहुत बड़ा झटका लग सकता है।

ट्रैवल एजेंसियों को करोड़ों का नुकसान

लगातार कैंसिलेशन के कारण एयरलाइन टिकट रिफंड, होटल बुकिंग कैंसिलेशन, पैकेज टूर रद्द और वीज़ा प्रोसेसिंग खर्च जैसी समस्याओं से ट्रैवल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध आगे और फैलता है तो उपभोक्ताओं का भरोसा (Consumer Confidence), यात्रा का उत्साह (Travel Sentiment) दोबारा सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।

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