Edited By Tanuja,Updated: 16 Sep, 2026 02:16 PM

ढाका यूनिवर्सिटी के पुनर्गठित संग्रहालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने से विवाद भड़क गया। एक छात्र ने तस्वीरें फाड़ दीं, जबकि वामपंथी छात्रों ने गुलाम आजम की तस्वीर लगाकर विरोध जताया। विभिन्न छात्र संगठनों की आपत्ति के बाद...
Dhaka: बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाना भारी विवाद की वजह बन गया है। विश्वविद्यालय के पुनर्गठित संग्रहालय में जिन्ना से जुड़ी तस्वीरें और ऐतिहासिक दस्तावेज लगाए जाने के बाद एक छात्र ने तस्वीरें फाड़ दीं। मामला बढ़ा तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी। मामला विश्वविद्यालय के पुनर्गठित संग्रहालय से जुड़ा है, जिसे दोबारा खोले जाने के दौरान जिन्ना और उपमहाद्वीप के इतिहास से संबंधित तस्वीरें और पुरानी कतरनें प्रदर्शित की गई थीं। इनमें 1948 में ढाका के रेसकोर्स मैदान में जिन्ना के भाषण से जुड़ी तस्वीर भी शामिल थी। इस भाषण में जिन्ना ने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राजभाषा बनाने की बात कही थी। बांग्लादेश में यह मुद्दा 1952 के भाषा आंदोलन के इतिहास से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय माना जाता है।
तस्वीरें सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में विरोध शुरू हो गया। सोमवार को एक छात्र संग्रहालय में पहुंचा और जिन्ना की तस्वीरें फाड़ दीं। इसके बाद अलग-अलग छात्र संगठनों की ओर से भी विरोध दर्ज कराया गया। वामपंथी छात्रों ने विरोध के लिए पूर्व जमात प्रमुख गुलाम आजम की जूतों से पिटाई वाली तस्वीर संग्रहालय में चस्पा कर दी। इससे विवाद और तेज हो गया। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के छात्र संगठन सहित कई छात्र संगठनों ने जिन्ना की तस्वीरें लगाए जाने पर आपत्ति जताई। संगठनों ने इसे विश्वविद्यालय की गरिमा से जोड़ते हुए विरोध दर्ज कराया। विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप किया। प्रशासन ने यह पता लगाने के लिए पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है कि बिना प्रशासनिक अनुमति के संवेदनशील ऐतिहासिक तस्वीरें संग्रहालय में कैसे लगाई गईं और इसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
जांच कमेटी की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद अलमुजद्दादे अलफसाने कर रहे हैं। उधर, ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन ने तस्वीरें लगाए जाने का बचाव किया है। उसका कहना है कि जिन्ना का महिमामंडन करना इसका उद्देश्य नहीं था। संगठन के मुताबिक, तस्वीरों के जरिए इतिहास के विवादित अध्याय और भाषा के सवाल से जुड़े दस्तावेजों को सामने रखा गया था। लेकिन बांग्लादेश में जिन्ना का नाम और 1948 का उनका भाषा संबंधी रुख आज भी बेहद संवेदनशील राजनीतिक-ऐतिहासिक मुद्दा है। 1952 का भाषा आंदोलन और 1971 का मुक्ति संग्राम बांग्लादेश की राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में ढाका यूनिवर्सिटी के संग्रहालय में जिन्ना की तस्वीरों का प्रदर्शन और उसके बाद छात्रों द्वारा तस्वीरें फाड़े जाने की घटना ने देश में इतिहास, राष्ट्रीय पहचान और मुक्ति संग्राम की विरासत को लेकर चल रही बहस को फिर तेज कर दिया है।