Edited By Rahul Singh,Updated: 12 Sep, 2026 07:09 PM

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। 'पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे' के अनुसार, देश की जीडीपी विकास दर घटकर महज़ 3.70 फीसदी पर आ गई है।
नई दिल्ली। चीन और रूस जैसे शक्तिशाली सहयोगियों की तरफदारी के बावजूद पाकिस्तान के लिए ब्रिक्स (BRICS) का दरवाजा लगातार बंद बना हुआ है। साल 2023 में ही औपचारिक आवेदन देने और ब्रिक्स बैंक में भारी निवेश करने के बाद भी इस्लामाबाद इस वैश्विक समूह में जगह बनाने में नाकाम रहा है। भारत का कड़ा रुख और ब्रिक्स के सर्वसम्मति नियम के कारण पाकिस्तान की सदस्यता का सपना साकार नहीं हो पा रहा है।
आर्थिक बदहाली और IMF से छुटकारा पाने की छटपटाहट
गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। 'पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे' के अनुसार, देश की जीडीपी विकास दर घटकर महज़ 3.70 फीसदी पर आ गई है। निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी पश्चिमी संस्थाओं पर अपनी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने ब्रिक्स द्वारा संचालित 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' (NDB) में 580 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी भी खरीदी है।
ग्लोबल साउथ पर ब्रिक्स का दबदबा और भारत की बढ़ती साख
पाकिस्तान का यह प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिक्स 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील और उभरते देशों) के सबसे प्रभावशाली और मजबूत मंच के रूप में स्थापित हो चुका है। आज ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग 49 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक जीडीपी में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है। ब्रिक्स के भीतर भारत का व्यापारिक और कूटनीतिक दबदबा तेजी से बढ़ा है। ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का निर्यात 48.8 फीसदी की भारी बढ़ोतरी के साथ 64.3 अरब डॉलर से बढ़कर 95.7 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जिससे समूह के भीतर नई दिल्ली का प्रभाव और अधिक मजबूत हुआ है।
मॉस्को से गुहार और कूटनीतिक कोशिशें
नवंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने आधिकारिक रूप से ब्रिक्स सदस्यता के लिए अर्जी देने की पुष्टि की थी। इसके बाद इस्लामाबाद ने सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कवायद शुरू की। रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने रूसी समाचार एजेंसी 'तास' से बातचीत में स्वीकार किया था कि उनका देश इस सिलसिले में लगातार मॉस्को से विशेष समर्थन की अपील कर रहा है।
भारत का रुख क्यों बना सबसे बड़ी दीवार?
बीजिंग और मॉस्को की सहमति के बावजूद पाकिस्तान को एंट्री न मिलने का मुख्य कारण ब्रिक्स का 'सर्वसम्मति का नियम' है। नियम के तहत, किसी भी नए देश को पूर्ण सदस्य या पार्टनर का दर्जा देने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की 100% सहमति अनिवार्य है। भारत अपनी वीटो शक्ति (Veto Power) का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के प्रवेश पर लगातार आपत्ति जताता रहा है।
समूह का लगातार विस्तार, लेकिन पाकिस्तान बाहर
शुरुआत में केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका (BRICS) का यह समूह अब तेज़ी से बड़ा हो रहा है। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को नए पूर्ण सदस्य के रूप में जोड़ा गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया इसमें शामिल हुआ। बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को ब्रिक्स के भागीदार देश का दर्जा मिला।