Edited By Tanuja,Updated: 28 May, 2026 03:51 PM

चीन में बढ़ती बेरोजगारी और “996 वर्क कल्चर” से परेशान युवा अब गांवों में चरवाहे की नौकरी करने को तैयार हैं। मंगोलिया सीमा के पास निकले दो पदों के लिए 700 से ज्यादा आवेदन आए। यह घटना चीन के बिगड़ते रोजगार बाजार और युवाओं के मानसिक तनाव को उजागर करती...
Bejing: चीन में बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और बेहद थका देने वाले “996 वर्क कल्चर” ने युवाओं को इस कदर परेशान कर दिया है कि अब वे महानगरों की कॉर्पोरेट नौकरियां छोड़कर गांवों में चरवाहे की नौकरी करने के लिए तैयार हैं। मंगोलिया सीमा के पास एक फार्म पर निकली चरवाहे की नौकरी ने पूरे चीन में रोजगार संकट की बहस छेड़ दी है। पूरा मामला तब सामने आया जब चीन के फार्म मालिक जुओ शियाओयोंग ने अप्रैल के आखिर में दक्षिणी मंगोलिया के घास के मैदानों में सिर्फ दो चरवाहों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। यह विज्ञापन चीन के लोकप्रिय सामाजिक माध्यम मंच वीबो पर तेजी से वायरल हो गया। कुछ ही घंटों में इसे करीब 5.9 करोड़ बार देखा गया और हजारों चर्चाएं शुरू हो गईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि केवल दो पदों के लिए 700 से ज्यादा लोगों ने आवेदन कर दिया।
इन आवेदकों में शंघाई और चोंगकिंग जैसे बड़े शहरों के कॉर्पोरेट कर्मचारी, फैक्ट्री मजदूर, विश्वविद्यालयों के टॉपर और हाल ही में पढ़ाई पूरी करने वाले ग्रेजुएट भी शामिल थे। फार्म मालिक के अनुसार लगभग 10 प्रतिशत आवेदन नए पासआउट युवाओं के थे। कई युवाओं ने बताया कि वे ऑफिस की राजनीति, लंबे काम के घंटे, मानसिक तनाव और बढ़ते कर्ज से परेशान हैं। कुछ लोग बेहतर मानसिक शांति और “धीमी जिंदगी” की तलाश में यह नौकरी करना चाहते हैं। इस नौकरी के लिए हर महीने लगभग 8 हजार युआन यानी करीब 1.1 लाख रुपये वेतन दिया जा रहा था। इसके साथ रहने और खाने की सुविधा भी मुफ्त थी। यह वेतन चीन के निजी क्षेत्र के औसत शहरी वेतन से अधिक माना जा रहा है।
हालांकि यह काम बेहद कठिन है। गर्मियों में करीब 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 3 हजार भेड़ों को चराना पड़ता है। वहीं सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जहां भेड़ों को चारा खिलाने और उनकी देखभाल का भारी काम करना होता है। इस घटना ने चीन के कुख्यात “996 वर्क कल्चर” को फिर चर्चा में ला दिया है। इस व्यवस्था में कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, सप्ताह में 6 दिन काम करना पड़ता है। लंबे समय से चीनी युवा इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। 21 वर्षीय जेम्स गुओ ने बताया कि वह कंटेनर फैक्ट्री में रोज 13 घंटे तक काम करते थे, जिससे उनके हाथों में छाले पड़ गए थे। वहीं 28 वर्षीय ई-कॉमर्स कर्मचारी वू ने कहा कि वह शहरों की भागदौड़ और तनाव से दूर शांत जीवन चाहती हैं।
चीन में “35 साल का श्राप” भी युवाओं की चिंता बढ़ा रहा है। कई कंपनियां 35 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों को नौकरी देने से बचती हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में हालात और मुश्किल हो सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल, फैक्ट्री लागत में वृद्धि और इस वर्ष नौकरी बाजार में उतरने वाले 1.27 करोड़ नए ग्रेजुएट्स से प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी। दिलचस्प बात यह रही कि अंत में फार्म मालिक ने नौकरी के लिए शहर के युवाओं के बजाय कृषि अनुभव रखने वाले दो विवाहित जोड़ों को चुना। उनका कहना था कि यह कोई “पर्यटन जीवन” नहीं बल्कि बेहद कठिन और अकेलेपन भरा काम है, जिसे हर कोई लंबे समय तक नहीं कर सकता।