Edited By Anu Malhotra,Updated: 25 Apr, 2026 02:55 PM

Defense Scientists Death: अमेरिका में 11 Top Defense Scientists की रहस्यमय मौत और लापता होने की खबरों से वाशिंगटन में हलचल मची हुई है। इसी तरह की घटनाएं चीन में भी सामने आ रही हैं। स्पेस, डिफेंस और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जैसे sensitive sectors में...
Defense Scientists Death: अमेरिका में 11 Top Defense Scientists की रहस्यमय मौत और लापता होने की खबरों से वाशिंगटन में हलचल मची हुई है। इसी तरह की घटनाएं चीन में भी सामने आ रही हैं। स्पेस, डिफेंस और न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जैसे sensitive sectors में काम करने वाले कम से कम 9 चीनी वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी वजह छिपी है?
किसी साजिश का पुख्ता सबूत नहीं
हालांकि अभी तक किसी साजिश का पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है, लेकिन इन मौतों का समय और वैज्ञानिकों के काम की संवेदनशीलता कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ऐसा ही एक मामला सामने आया चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के 38 वर्षीय प्रोफेसर फेंग यांगहे का जिनकी 1 जुलाई 2023 को बीजिंग में एक संदिग्ध कार दुर्घटना में मौत हो गई। वह ताइवान से जुड़े संभावित सैन्य टकराव पर काम कर रहे थे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए युद्ध रणनीतियों का मॉडल तैयार कर रहे थे।
Feng Yanghe को चीन के उभरते हुए AI वैज्ञानिकों में गिना जाता था। उन्होंने War Skull नाम का प्लेटफॉर्म बनाया था, जिसने उनकी मौत से पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं जीती थीं। उनकी अचानक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सरकारी विज्ञान वेबसाइट ने अपने शोक संदेश में लिखा कि उन्हें “बलिदान” दिया गया, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया। चीन के अखबार China Daily के मुताबिक, फेंग की मौत सुबह करीब 2:35 बजे हुई, जब वे एक मीटिंग से लौट रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि वे एक 'महत्वपूर्ण कार्य' पर काम कर रहे थे, लेकिन इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
पश्चिमी थिंक टैंक में काम कर रहे एक शोधकर्ता ने इस पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कार दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति को आमतौर पर 'बलिदान' नहीं कहा जाता। उन्होंने यह भी कहा कि फेंग सैन्य AI और ताइवान से जुड़े सिमुलेशन पर गहराई से काम कर रहे थे और उनकी मौत का समय असामान्य है। शोधकर्ता के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में ये मौतें हुई हैं, जैसे हाइपरसोनिक्स और सैन्य AI, वे भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने Newsweek से बातचीत में कहा कि संभव है कोई विरोधी देश चीन की प्रगति धीमी करने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान है।
वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं है। वहीं, व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में जब अमेरिकी वैज्ञानिकों की मौतों पर सवाल पूछा गया, तो प्रेस सचिव ने सीधा जवाब नहीं दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इन घटनाओं को 'गंभीर मामला' बताया और उम्मीद जताई कि यह सिर्फ संयोग हो।
वैज्ञानिकों को निशाना बनाने के आरोप लेकिन कोई सबूत नहीं
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि अतीत में ईरान के nuclear program को धीमा करने के लिए इज़राइल पर वैज्ञानिकों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं। हालांकि, अमेरिका, चीन या रूस द्वारा ऐसे किसी अभियान का कोई सबूत नहीं मिला है। चीन में अन्य वैज्ञानिकों की मौतों में 62 वर्षीय अंतरिक्ष विशेषज्ञ झांग शियाओशिन शामिल हैं, जिनकी दिसंबर 2024 में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वे सैटेलाइट मौसम और चेतावनी सिस्टम पर काम करते थे।
ड्रोन विशेषज्ञ झांग दाइबिंग की भी 47 वर्ष की उम्र में हुनान प्रांत में मृत्यु हो गई। उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया। डेटा वैज्ञानिक लियू डोंगहाओ की 2024 में एक अज्ञात दुर्घटना में मौत हुई। वे डेटा सुरक्षा सिस्टम के विशेषज्ञ माने जाते थे।
बायोमेडिकल केमिस्ट ली मिनयोंग का नवंबर 2025 में ग्वांगझू में अचानक बीमारी से निधन हो गया। वे नई दवाओं के विकास पर काम कर रहे थे। माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ चेन शुमिंग की 2018 में कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। वे हथियारों में इस्तेमाल होने वाली चिप टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे थे।
प्रसिद्ध chemist झोउ गुआंगयुआन की दिसंबर 2023 में 51 वर्ष की उम्र में मौत हो गई, लेकिन कारण नहीं बताया गया। हाइपरसोनिक्स विशेषज्ञ फांग डाइनिंग की फरवरी में दक्षिण अफ्रीका में एक मेडिकल इमरजेंसी के बाद मौत हो गई। वे advanced space materials पर शोध कर रहे थे। एक अन्य हाइपरसोनिक्स वैज्ञानिक यान हांग की मार्च में बीमारी से मृत्यु हो गई। वे पहले अमेरिका में काम कर चुके थे और बाद में चीन लौट आए थे। इन सभी घटनाओं में एक समान बात यह है कि ज्यादातर वैज्ञानिक अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में काम कर रहे थे। फिर भी, अभी तक किसी ठोस साजिश का प्रमाण सामने नहीं आया है। यही वजह है कि ये घटनाएं रहस्य बनी हुई हैं।