कनाडाई राजनयिक की चेतावनीः कनाडा को चीन के साथ व्यापार पड़ेगा भारी, झेलना पड़ सकता अमेरिका का गुस्सा

Edited By Updated: 22 Apr, 2026 05:10 PM

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कनाडा का चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का कदम जोखिम भरा बताया गया है। पूर्व राजनयिक माइकल कोवरिग ने चेतावनी दी कि इससे अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पर बढ़ती निर्भरता कनाडा की अर्थव्यवस्था और नीतियों को प्रभावित कर सकती...

International Desk: कनाडा का चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का फैसला अब बड़े आर्थिक और कूटनीतिक जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम कनाडा की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है और उसके सबसे बड़े साझेदार  अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। पूर्व कनाडाई राजनयिक माइकल कोवरिग (Michael Kovrig) ने इस नीति को “रिस्की प्ले” बताया है। उनका कहना है कि चीन, अमेरिका के साथ कनाडा की समस्याओं का समाधान नहीं है। अगर कनाडा चीन के साथ ज्यादा नजदीकी बढ़ाता है, तो वॉशिंगटन की नजर में वह एक “अविश्वसनीय सहयोगी” बन सकता है, जिससे भविष्य के व्यापार समझौतों पर असर पड़ सकता है।

 

आंकड़ों के अनुसार, कनाडा का लगभग 75% निर्यात अमेरिका को जाता है, जबकि चीन का हिस्सा सिर्फ करीब 4% है। इसका मतलब है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। ऐसे में चीन की ओर झुकाव संतुलन बिगाड़ सकता है। प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने चीन के साथ एक नई डील की है। इस समझौते के तहत सीमित संख्या में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का आयात किया जाएगा और कुछ कनाडाई कृषि उत्पादों पर टैरिफ में राहत दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक चीन को निर्यात 50% तक बढ़ाना है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस डील को लेकर कई चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि चीन इस समय “बेचने” की स्थिति में है, यानी वह अपने उत्पाद दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा निर्यात करना चाहता है, जबकि खरीदने में उसकी रुचि कम है। इससे कनाडा के बाजार में सस्ते चीनी सामान की भरमार हो सकती है, जो स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

 

माइकल कोवरिग ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बड़े रिटेल स्टोर छोटे दुकानदारों को खत्म कर देते हैं, वैसे ही सस्ते आयात घरेलू उद्योग को कमजोर कर सकते हैं। इससे धीरे-धीरे कनाडा की चीन पर निर्भरता बढ़ सकती है।  कृषि क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई गई है। कनाडा के कैनोला, पोर्क और सीफूड जैसे सेक्टर पहले से ही चीन पर काफी निर्भर हैं। अगर भविष्य में चीन किसी कारण से इन उत्पादों का आयात बंद कर देता है, तो इन सेक्टरों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है और हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन आर्थिक दबाव का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकता है। जैसे-जैसे कनाडा की निर्भरता बढ़ेगी, चीन अपने बाजार में ज्यादा पहुंच या ज्यादा कोटा मांग सकता है, जिससे कनाडा की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।

 

 हालांकि, कोवरिग ने यह नहीं कहा कि चीन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। उनका सुझाव है कि कनाडा को चीन के साथ व्यापार जरूर करना चाहिए, लेकिन बहुत सावधानी और सख्त नियंत्रण के साथ, ताकि किसी तरह का दुरुपयोग न हो। कुल मिलाकर, कनाडा का यह कदम एक तरफ नए आर्थिक अवसर खोल सकता है, लेकिन दूसरी तरफ यह अमेरिका के साथ उसके संबंधों और घरेलू उद्योगों के लिए खतरा भी बन सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा को संतुलन बनाकर और सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा।

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