SIPRI रिपोर्ट का खुलासा: इस देश के हथियारों पर टिकी है पाकिस्तान की सैन्य ताकत...

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 06:15 PM

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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक हथियार बाजार और दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा केंद्र पाकिस्तान और चीन का गहराता सैन्य गठबंधन है। आज...

SIPRI Report: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक हथियार बाजार और दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा केंद्र पाकिस्तान और चीन का गहराता सैन्य गठबंधन है। आज पाकिस्तान अपनी सैन्य जरूरतों के लिए पूरी तरह से बीजिंग पर निर्भर हो चुका है।

आंकड़े बताते हैं कि 2021-25 के बीच पाकिस्तान ने जितने भी हथियार विदेशों से खरीदे, उनमें से 80% अकेले चीन से आए हैं। यह निर्भरता कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन दुनिया भर में जितने हथियार बेचता है, उसका 61% हिस्सा सिर्फ पाकिस्तान को जाता है। इसी भारी खरीदारी के चलते पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन गया है, जो कुछ साल पहले तक 10वें नंबर पर था।

भारत की रणनीति: चुनौती और बदलाव का दौर
दुनिया के हथियार खरीदारों की सूची में भारत दूसरे स्थान पर है, जो वैश्विक आयात का 8.2% हिस्सा कवर करता है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की इस बड़ी सैन्य खरीदारी के पीछे चीन और पाकिस्तान के साथ जारी सीमा तनाव एक मुख्य कारण है। विशेष रूप से मई 2025 में हुए हालिया टकराव ने भारत को अपनी सुरक्षा तैयारियों को और पुख्ता करने के लिए प्रेरित किया है।

हालांकि, भारत की कहानी में एक सकारात्मक मोड़ भी है। पिछले एक दशक में भारत के हथियार आयात में 4% की गिरावट आई है। यह इस बात का संकेत है कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत देश के भीतर ही हथियारों की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ रही है। लेकिन, घरेलू उत्पादन में होने वाली देरी के कारण भारत अभी भी लड़ाकू विमानों (फ्रांस से) और पनडुब्बियों (जर्मनी से) जैसे जटिल सिस्टम्स के लिए विदेशी सप्लायर्स की ओर देख रहा है।

रूस से बढ़ती दूरी और पश्चिमी देशों का साथ
भारतीय रक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव रूस के साथ रिश्तों में दिख रहा है। एक समय था जब भारत के 70% हथियार रूस से आते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 40% रह गया है। रूस पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अब फ्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों से अपने रक्षा संबंध मजबूत किए हैं। सिपरी के विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत का डर न केवल भारत, बल्कि अन्य पड़ोसी देशों के रक्षा बजट और हथियार खरीदने के फैसलों को भी प्रभावित कर रहा है।

वैश्विक परिदृश्य: कौन है सबसे आगे?
अगर पूरी दुनिया की बात करें, तो यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान Top-5 खरीदार देश बनकर उभरे हैं। हथियारों की सप्लाई के मामले में अमेरिका 42% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बना हुआ है। इसके बाद फ्रांस दूसरे और रूस तीसरे नंबर पर है। रूस के निर्यात में बड़ी गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण उसके पारंपरिक ग्राहकों (चीन, मिस्र आदि) द्वारा खरीदारी कम करना है। इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध के कारण 1960 के बाद पहली बार यूरोप दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार क्षेत्र बनकर उभरा है।

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