UN ने पाकिस्तान में अहमदियों के उत्पीड़न पर दिखाई सख्ती, कहा- हमले और नफरत की राजनीति बंद करो

Edited By Updated: 08 Sep, 2026 03:41 PM

un human rights experts ask pakistan to end persecution of ahmadiyya community

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ हिंसा, भेदभाव, मुकदमों और धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप की खबरों पर चिंता जताई है। उन्होंने पाकिस्तान से दंडमुक्ति खत्म करने, हमलावरों की जवाबदेही तय करने और...

islamabad: पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ भेदभाव और हिंसा की लगातार सामने आ रही खबरों पर गंभीर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस्लामाबाद से ऐसे मामलों में ''दंडमुक्ति के चलन'' को खत्म करने का आग्रह किया, जिससे हमलावरों को बिना रोक-टोक कार्रवाई करने का अवसर मिलता है। जिनेवा से सोमवार को जारी एक बयान में विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों को पूरा करने का भी आह्वान किया। विशेषज्ञों ने कहा, ''हम लगातार सामने आ रही उन खबरों से बेहद चिंतित हैं कि अहमदिया समुदाय के सदस्यों को उनकी धार्मिक पहचान के कारण उत्पीड़न, आपराधिक मुकदमों, हिंसा और बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है।''

 

उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान को दंडमुक्ति के उस चलन को खत्म करना चाहिए, जिसने हमलों और नफरत तथा हिंसा के लिए उकसाने वालों को बिना किसी रोक-टोक के काम करने दिया है।'' विशेषज्ञों ने कहा कि ये हमले ''अप्रत्यक्ष आधिकारिक मिलीभगत'' के बीच हो रहे हैं, जबकि भय के माहौल में लोग और संस्थाएं इन अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा नहीं कर पाते। पाकिस्तान की संसद ने 1974 में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित किया था। इसके एक दशक बाद उन्हें खुद को मुस्लिम कहने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्हें धार्मिक प्रचार करने और हज के लिए सऊदी अरब जाने पर भी रोक है।

 

विशेषज्ञों ने अहमदिया समुदाय के पूजा स्थलों पर जारी हमलों, कब्रों को क्षतिग्रस्त किए जाने, ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा समेत शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप, धार्मिक आस्था या पहचान से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियों एवं मुकदमों और उनके खिलाफ नफरत फैलाने वाले भाषणों की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट हिंसा रोकने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और कमजोर समुदायों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।  

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