Edited By Pardeep,Updated: 29 Oct, 2026 11:19 PM

पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक नीतियों पर एक बार फिर यू-टर्न ले लिया है। बीजिंग की 'वन चाइना' (One China) नीति के समर्थन में ताइवान की दो एयरलाइंस को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल से रोकने वाला पाकिस्तान दुनिया का पहला देश बन गया।
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक नीतियों पर एक बार फिर यू-टर्न ले लिया है। बीजिंग की 'वन चाइना' (One China) नीति के समर्थन में ताइवान की दो एयरलाइंस को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल से रोकने वाला पाकिस्तान दुनिया का पहला देश बन गया। हालांकि, इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने ताइवानी उड़ानों के लिए अपने ओवरफ्लाइट अधिकारों को फिर से बहाल कर दिया।
लंबे रास्तों से गुजरने लगे ताइवानी विमान
28 अक्टूबर को यह रिपोर्ट सामने आई थी कि ताइवानी एयरलाइंस ने पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से बचने के लिए लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 'फ्लाइटराडार24' (Flightradar24) के आंकड़ों के अनुसार, 24 अक्टूबर को ताइपे से रोम जा रही 'चाइना एयरलाइंस' की एक उड़ान ने भारत, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान वाले अपने नियमित मार्ग के बजाय रूसी हवाई क्षेत्र से होकर उड़ान भरी थी।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान और ताइवान की आपत्ति
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ब्लूमबर्ग न्यूज से बातचीत में कहा था कि उनका उड्डयन विभाग 'वन चाइना' नीति का पालन करता है और केवल मुख्य भूमि (मेनलैंड) चीन को ही अनुमति दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने केवल चीनी एयरलाइंस को ही अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति दी है।
दूसरी ओर, ताइवान ने संदेह जताया है कि पाकिस्तान द्वारा उसके विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने के पीछे चीन की भूमिका हो सकती है। ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग-ची ने कहा कि यह कदम पूरी दुनिया में एक बहुत ही खतरनाक संदेश भेजता है। हालांकि, उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।
भारत ने दिए सीधी उड़ानों के संकेत
ताइवानी एयरलाइंस को पाकिस्तान द्वारा एयरस्पेस देने से इनकार करने की खबरों के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने भारत और ताइवान के बीच सीधी उड़ानों की संभावना की ओर इशारा किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को कहा, "मेरा मानना है कि अगर सीधी उड़ानें होती हैं, तो वे उड़ेंगी"।
क्या है 'वन चाइना' नीति और पाक-चीन संबंध?
'वन चाइना' नीति के तहत बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का एक अविभाज्य अंग मानता है। चालू वर्ष के जनवरी महीने में भी पाकिस्तान ने ताइवान को चीन का "अविभाज्य हिस्सा" बताते हुए वन चाइना नीति के प्रति अपने समर्थन की पुष्टि की थी।
ताइवान बीजिंग के दावों को खारिज करता है और अपना स्वशासन चलाता है, लेकिन बेलीज और तुवालु सहित केवल 12 देश ही इसे आधिकारिक रूप से मान्यता देते हैं। इसके अलावा, राजनीतिक तनावों के कारण ताइवानी एयरलाइंस को मुख्य भूमि चीन के ऊपर से उड़ान भरने से भी प्रतिबंधित किया गया है। गौरतलब है कि 1951 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से पाकिस्तान और चीन के बीच मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, जिसे वे अक्सर "सदाबहार साझेदारी" (All-weather partnership) कहते हैं।