Edited By Tanuja,Updated: 27 May, 2026 02:01 PM

फ्रांस की राजधानी पेरिस में भीषण हीटवेव के बीच बिना एसी वाली ट्रेन में यात्रियों की हालत बिगड़ गई। पेरिस से नीस जा रही ट्रेन को बीच रास्ते रोकना पड़ा। यात्री लगभग चार घंटे तक बाहर गर्मी से राहत तलाशते रहे। घटना के बाद फ्रांस की सार्वजनिक परिवहन...
International Desk: फ्रांस (France) इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है और इसका असर अब सार्वजनिक परिवहन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पेरिस से नीस के बीच चलने वाली एक ट्रेन को बीच रास्ते रोकना पड़ा क्योंकि ट्रेन में एयर कंडीशनिंग नहीं थी और गर्मी के कारण यात्रियों की हालत खराब होने लगी।रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रेन के अंदर तापमान बेहद बढ़ गया था। शीशों से बंद डिब्बों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने के कारण कई यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर ट्रेन को रोक दिया गया। इसके बाद यात्री करीब चार घंटे तक ट्रेन से बाहर ट्रैक के आसपास घूमते रहे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यात्री छांव तलाशते, पानी पीते और गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते दिखाई दिए।
बाद में राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और यात्रियों की मदद की गई। इस घटना ने यूरोप में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के बीच सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रांस के कई हिस्सों में इस समय तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पश्चिमी इलाकों में हालात और ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रांस और यूरोप के कई ठंडे देशों का परिवहन ढांचा इतनी तेज गर्मी झेलने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वहां पारंपरिक रूप से इतनी गर्मी कम पड़ती रही है। कई फ्रांसीसी नागरिकों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। एक यात्री ने स्थानीय मीडिया से कहा कि यह शर्मनाक है कि 2026 में भी कई ट्रेनों में एयर कंडीशनिंग की उचित व्यवस्था नहीं है जबकि टिकटों की कीमत लगातार बढ़ रही है। उसने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
फ्रांसीसी अधिकारियों ने माना कि असामान्य गर्मी लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गर्मी वहां बेहद दुर्लभ मानी जाती थी, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो भारत में भी वायरल हो रहे हैं। कई भारतीय यूजर्स ने इसे लेकर फ्रांस और यूरोप की व्यवस्था पर तंज कसा। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विकसित देशों में ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, इसलिए एक अकेली घटना के आधार पर तुलना करना ठीक नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यूरोप के देशों को अपनी रेलवे और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बदलते मौसम के हिसाब से आधुनिक बनाना पड़ेगा, वरना ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।