अमेरिका-ईरान टकराव के बीच जिनेवा में वार्ताः दोनों देशों में परमाणु डील पर आगे बढ़ी बात, तेहरान दो हफ्ते में...

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 12:50 PM

progress made iran to come back in two weeks with detailed proposals

अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में कुछ प्रगति का दावा करते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान दो हफ्तों में विस्तृत प्रस्तावों के साथ लौटेगा। जिनेवा में हुई बातचीत से पहले और बाद में दोनों देशों ने सख़्त बयानबाज़ी जारी रखी।

International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी उच्चस्तरीय परमाणु वार्ता को लेकर एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि बातचीत में “कुछ ठोस प्रगति” हुई है और ईरान अगले दो सप्ताह में विस्तृत प्रस्तावों के साथ दोबारा वार्ता में लौटेगा। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के रुख में अब भी कई अंतर बने हुए हैं, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने आश्वासन दिया है कि वह इन खाइयों को पाटने के लिए ठोस और लिखित प्रस्ताव पेश करेगा।

 

मंगलवार को Geneva में अमेरिकी दूत Steve Witkoff और राष्ट्रपति Donald Trump के दामाद Jared Kushner ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की। यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी अपने चरम पर थी। वार्ता से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि समझौता नहीं हुआ तो इसके “गंभीर परिणाम” होंगे। उन्होंने जून 2025 में हुए बी-2 बॉम्बर हमले का हवाला देते हुए तेहरान से “समझदारी” दिखाने की अपील की।

 

वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका की सैन्य शक्ति को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे ताक़तवर सेना भी कभी-कभी इस तरह प्रहार झेल सकती है कि दोबारा खड़ी न हो सके। खामेनेई ने अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी पर तंज कसते हुए कहा कि युद्धपोत से भी अधिक ख़तरनाक वह हथियार होता है, जो उसे समुद्र की गहराई में पहुंचा सकता है।

 

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की नींव जुलाई 2015 में पड़ी थी, जब संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन 3.67 प्रतिशत तक सीमित करने और भंडार घटाने पर सहमति दी थी। हालांकि, 2018 में ट्रंप द्वारा अमेरिका को समझौते से बाहर निकालने के बाद यह डील टूट गई। अब एक बार फिर दोनों देश परमाणु समझौते को नए सिरे से पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन सख़्त चेतावनियों और सैन्य दबाव के बीच यह रास्ता अभी भी बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

 

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