ब्रिटेन में पाकिस्तानी गैंग ने 1400 बच्चियों का किया यौन शोषण; 13 साल की बच्ची का 600-700 लोगों से करवाया रेप, कुत्तों के पिंजरे में बंद कर...

Edited By Updated: 02 Jun, 2026 06:26 PM

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ब्रिटेन के सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में ग्रूमिंग गैंग्स कांड से जुड़ी पीड़िताओं की गवाहियां पढ़कर नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में पाकिस्तानी मूल के संगठित गिरोहों की भूमिका सामने आई, जबकि पुलिस और अन्य संस्थाएं पीड़ितों...

London: ब्रिटेन में वर्षों से विवाद का विषय रहे "गूमिंग गैंग्स" मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। स्वतंत्र सांसद Rupert Lowe ने ब्रिटिश संसद में कई पीड़िताओं की गवाहियां पढ़ते हुए दावा किया कि संगठित बाल यौन शोषण के मामलों में गंभीर संस्थागत विफलताएं हुईं और अनेक पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिला। लोव ने कहा कि उनकी स्वतंत्र जांच के दौरान सामने आए बयान बेहद भयावह हैं। पीड़िताओं ने कथित तौर पर लंबे समय तक यौन शोषण, धमकियों, हिंसा और अधिकारियों की उदासीनता का सामना करने की बात कही। सांसद ने संसद से इन गवाहियों को गंभीरता से सुनने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की।

 

एक पीड़िता ने बताया कि जब वह 12 साल की थी तो एक अपराधी ने जबरन शराब की बोतल उसके शरीर में डाल दी और शीशा तोड़ दिया।  अन्य गवाही में महिला ने दावा किया कि दुर्व्यवहार के दौरान देश के  कई पुलिस अधिकारी भी उसके साथ बलात्कार में शामिल रहे। 13 वर्षीय अन्य पीड़िता ने बताया कि तीन साल के दौरान करीब 600-700 अलग-अलग पुरुषों से उसका  बलात्कार करवाया गया। एक अन्य लड़की ने 15 साल की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी योनि और गुदा दोनों से रेप हुआ । इसके अलावा कुछ गवाहियों में पशुता की हद पार करने वाले जघन्य कृत्यों का भी जिक्र है। एक पीड़िता ने बताया कि उसे वैन में कुत्तों के पिंजरों में बंद 15-20 लड़कियों के साथ देखा गया। दूसरी ने बताया  कि कुत्तों को लाकर उसके साथ बलात्कार करवाया गया, जबकि  गैंग के बाकी लोग शर्त लगा रहे थे, वीडियो बना रहे थे, हंस रहे थे । 

 

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ पीड़िताओं ने दावा किया कि उनका शोषण किशोरावस्था में शुरू हुआ और कई वर्षों तक चलता रहा। गवाहियों में अस्पतालों, सामाजिक सेवाओं और पुलिस की कथित विफलताओं का भी उल्लेख किया गया है। कई गवाहियों में नस्लीय पक्ष भी उभरकर आया। अपराधी श्वेत और ईसाई लड़कियों को 'कम नैतिक मूल्यों वाली' मानते थे, जबकि मुस्लिम लड़कियों को उच्च नैतिकता वाला बताते थे।  जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इन गिरोहों में मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के पुरुष शामिल हैं, जो दशकों से सक्रिय हैं। रिपोर्ट में सार्वजनिक निकायों और पुलिस की 'घोर लापरवाही' और 'संस्थागत विफलता' की भी कड़ी आलोचना की गई है।  बता दें कि यह मुद्दा सबसे पहले यॉर्कशायर के रोदरहम शहर में सामने आया था। 1997 से 2013 के बीच वहां 1400 से अधिक बच्चों का यौन शोषण हुआ।

 

प्रोफेसर एलेक्सिस जे की 2014 रिपोर्ट के अनुसार, नस्लवाद का डर दिखाकर अधिकारियों ने हस्तक्षेप नहीं किया। इसी पैटर्न को रोशडेल, ऑक्सफोर्ड, टेलफोर्ड, ब्रिस्टल समेत करीब 50 शहरों में दोहराया गया।2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा गठित बाल यौन शोषण टास्कफोर्स ने एक वर्ष में 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया। आंकड़ों के अनुसार, 2023 में बच्चों के खिलाफ 1.15 लाख से अधिक यौन अपराध दर्ज हुए, जिनमें 3.7 प्रतिशत मामले गिरोह-आधारित थे। 2024 में ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम की स्वतंत्र समीक्षा ने रोशडेल में 2004-2012 के बीच बड़े पैमाने पर शोषण की पुष्टि की और स्थानीय अधिकारियों की विफलताओं को उजागर किया। 

 
ब्रिटिश सरकार पहले ही गूमिंग गैंग्स से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक वैधानिक राष्ट्रीय जांच शुरू कर चुकी है। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संस्थाएं कहां विफल रहीं, पीड़ितों को न्याय कैसे मिले और भविष्य में ऐसे अपराधों को कैसे रोका जाए। मामले का एक संवेदनशील पहलू अपराधियों की पृष्ठभूमि और अपराध के पैटर्न को लेकर भी है। आधिकारिक रिपोर्टों और ऑडिट में कुछ क्षेत्रों में पाकिस्तानी मूल के अपराधियों के अनुपात पर चर्चा हुई है, लेकिन विशेषज्ञों और अधिकारियों ने यह भी जोर दिया है कि अपराध की जिम्मेदारी व्यक्तियों की होती है और किसी पूरे समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
  

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