क्या आपकी भी गंभीर मौके पर छूटने लगती है हंसी? इसके पीछे छिपा दिमाग का अनोखा खेल, वैज्ञानिकों ने खोले रहस्यमयी राज

Edited By Updated: 19 Oct, 2026 02:57 PM

scientists have found that the brain produces two distinct types of laughter

हंसी केवल मनोरंजन का परिणाम नहीं, बल्कि मस्तिष्क की जटिल प्रक्रियाओं से जुड़ी है। शोध के अनुसार, सामान्य और बेकाबू हंसी में अलग-अलग तंत्र सक्रिय होते हैं। हंसी सामाजिक संबंध मजबूत करती है और कुछ परिस्थितियों में दर्द की अनुभूति कम कर सकती है।...

London: कभी-कभी हंसी ऐसे मौके पर छूटती है, जब गंभीर रहना जरूरी होता है। लाख कोशिशों के बावजूद हंसी नहीं रुकती और बोलना तक मुश्किल हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसके पीछे केवल मजेदार बात नहीं, बल्कि मस्तिष्क के अलग-अलग तंत्र काम करते हैं। सामान्य हंसी और बेकाबू हंसी की प्रक्रिया भी एक-दूसरे से अलग होती है। हंसी को अक्सर मनोरंजन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे सामाजिक कारण भी अहम हैं। शोध के अनुसार, अकेले होने की तुलना में किसी दूसरे व्यक्ति के साथ होने पर हंसने की संभावना लगभग 30 गुना अधिक होती है। किसी परिचित और पसंदीदा व्यक्ति के साथ यह संभावना और बढ़ जाती है।हंसी बातचीत को सहज बनाती है, आपसी सहमति जताती है और रिश्तों को मजबूत करती है। दूसरों को हंसते देखकर खुद हंसने लगना भी इसी सामाजिक व्यवहार का हिस्सा है।


मस्तिष्क के दो तंत्र करते हैं काम
शोधकर्ताओं के मुताबिक, हंसी से जुड़े मस्तिष्क के दो अलग-अलग तंत्र हैं। पहला तंत्र खुशी और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ा है, जो बेकाबू हंसी पैदा कर सकता है। दूसरा तंत्र बोलने जैसी गतिविधियों से संबंधित है और बातचीत के दौरान आने वाली सामान्य हंसी में भूमिका निभाता है। मस्तिष्क के इन तंत्रों का अध्ययन आसान नहीं है, क्योंकि हंसते समय शरीर में काफी हलचल होती है। इसके बावजूद मिर्गी के मरीजों के उपचार के दौरान मस्तिष्क के कुछ हिस्सों को विद्युत उत्तेजना देने पर हंसी पैदा होने के संकेत मिले हैं।

 

बेकाबू हंसी में दर्द भी हो सकता कम
भावनात्मक और बेकाबू हंसी का संबंध मस्तिष्क की उन पुरानी प्रणालियों से है, जो मनुष्यों सहित दूसरे स्तनधारी जीवों में आवाज और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं। इस दौरान आनंद और संतुष्टि से जुड़ी ओपिओइड प्रणाली भी सक्रिय हो सकती है। इससे कुछ समय के लिए दर्द कम महसूस होने की संभावना समझी जा सकती है।इसके विपरीत, बातचीत के दौरान आने वाली हंसी बोलने की प्रक्रिया से अधिक जुड़ी होती है। वर्ष 2022 के एक अध्ययन में भी सामान्य बातचीत के दौरान हंसने और बोलने में मुंह तथा गले की गतिविधियों के बीच समानताएं पाई गईं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मस्तिष्क के बोलने और स्वेच्छा से हंसने को नियंत्रित करने वाले हिस्से को नुकसान पहुंचने पर व्यक्ति को बोलने में गंभीर परेशानी हो सकती है, जबकि हंसने और रोने की क्षमता बनी रह सकती है। हंसी पर हो रहे शोध से वैज्ञानिकों को न केवल मस्तिष्क की कार्यप्रणाली, बल्कि सामाजिक संबंधों, भावनाओं, सहानुभूति और दर्द को नियंत्रित करने की प्रक्रियाओं को समझने में भी मदद मिल रही है। 
 

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