Edited By Tanuja,Updated: 11 May, 2026 11:34 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति 13-15 मई तक चीन दौरे पर रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ उनकी सरकार चीनी कंपनियों पर लगातार प्रतिबंध लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप बीजिंग जाकर राष्ट्रपति Xi Jinping से मुलाकात करेंगे। इससे वैश्विक राजनीति में नए समीकरणों की...
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन नीति एक बार फिर दुनिया को उलझन में डाल रही है। एक तरफ ट्रंप लगातार चीनी कंपनियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर नए प्रतिबंध लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अचानक चीन की यात्रा को मंजूरी देकर वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप अब बीजिंग के साथ कोई बड़ा रणनीतिक दांव खेलने जा रहे हैं? क्या यह सिर्फ व्यापार और ताइवान तनाव कम करने की कोशिश है, या फिर ईरान युद्ध, होर्मुज संकट और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर अमेरिका-चीन के बीच कोई नई डील बनने वाली है?
ट्रंप 3 दिन चीन की आधिकारिक यात्रा पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर ट्रंप यह यात्रा कर रहे हैं। करीब नौ वर्षों में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन की यह पहली यात्रा है। ट्रंप की यह यात्रा अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट और ताइवान समेत कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तवाव के दौरान हो रही है।
क्या होगा प्रोग्राम?
- अमेरिकी प्रधान उप प्रेस सचिव अन्ना केली ने रविवार को कहा कि ट्रंप बुधवार शाम बीजिंग पहुंचेंगे।
- अमेरिकी नेता बृहस्पतिवार को एक स्वागत समारोह और राष्ट्रपति शी के साथ द्विपक्षीय बैठक में भाग लेंगे।
- दोनों नेता शुक्रवार को फिर मुलाकात करेंगे और चाय के दौरान द्विपक्षीय चर्चा करेंगे।
- फिर दोपहर के भोजन के दौरान भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
- अमेरिका इस साल के अंत में चीनी नेता की यात्रा की मेजबानी करने की योजना बना रहा है।
ट्रंप क्या नया दांव खेलने जा रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप एक साथ “दबाव और संवाद” की रणनीति अपना रहे हैं। वह एक ओर चीन की आर्थिक और तकनीकी ताकत को सीमित करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर बीजिंग के साथ सीधे संपर्क बनाए रखकर बड़े वैश्विक संकटों पर सौदेबाजी की कोशिश कर रहे हैं।हाल के महीनों में अमेरिका ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों, AI टेक्नोलॉजी, चिप सेक्टर और डेटा सिस्टम्स पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी सांसदों ने तो चीनी स्मार्ट कारों को “चलती-फिरती जासूसी मशीन” तक बता दिया। लेकिन इसके बावजूद ट्रंप की बीजिंग यात्रा यह संकेत दे रही है कि दोनों महाशक्तियां खुली टकराव की बजाय नियंत्रित प्रतिस्पर्धा का रास्ता तलाश रही हैं।
किन मुद्दों पर होगी बड़ी बातचीत
ट्रंप और शी के बीच होने वाली बैठकों में कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो सकती है—
- Strait of Hormuz संकट और वैश्विक तेल सप्लाई
- अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध
- ताइवान विवाद
- व्यापार युद्ध और टैरिफ
- इंडो-पैसिफिक सुरक्षा
- सेमीकंडक्टर और AI टेक्नोलॉजी
दुनिया की नजर इस मुलाकात पर
विश्लेषकों के मुताबिक यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीति नहीं बल्कि आने वाले वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत हो सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित है और अमेरिका-चीन तनाव भी चरम पर है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच कोई समझ बनती है तो इसका असर तेल बाजार, एशिया की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस साल के अंत में Xi Jinping की अमेरिका यात्रा भी हो सकती है।