Edited By Tanuja,Updated: 25 Aug, 2026 05:32 PM

बांग्लादेश से चीन जाने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2020-25 के बीच 4,226 महिलाओं ने Q1 फैमिली वीजा लिया। 2022 में संख्या 35 थी, जो 2025 में 1,721 हो गई। सामने आए कथित जबरन विवाह, फर्जी दस्तावेज और शोषण के मामलों ने मानव तस्करी की चिंता...
Dhaka: बांग्लादेश से चीन जाने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने मानव तस्करी को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। बांग्लादेशी अखबार ‘डेली सन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में महिलाएं Q1 फैमिली रीयूनियन वीजा के जरिए चीन जा रही हैं। यह अपने आप में कोई अपराध नहीं है, लेकिन सामने आए कुछ कथित तस्करी मामलों ने इस प्रवास मार्ग की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अपराधी बिचौलिए वैध शादी और परिवार से जुड़ी प्रवास प्रक्रिया का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। मानव तस्करी से जुड़े कानूनों पर हाल में आयोजित एक कार्यशाला में पेश आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से 2025 के बीच कम से कम 4,226 बांग्लादेशी महिलाओं ने चीन जाने के लिए Q1 वीजा लिया। आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाई देती है। यानी 2022 से 2025 के बीच यह संख्या कई गुना बढ़ गई।
- 2022: 35 महिलाएं
- 2023: 1,016 महिलाएं
- 2024: 1,378 महिलाएं
- 2025: 1,721 महिलाएं
कानून प्रवर्तन और मानव तस्करी विरोधी संगठनों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है। पोर्ट के अनुसार, सामने आए कथित मामलों में कई महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। इनमें बांग्लादेश के चटगांव हिल ट्रैक्ट्स के कुछ आदिवासी समुदायों की महिलाएं भी शामिल बताई गई हैं।रंगामाटी के एक चकमा परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी एक युवती को ढाका ले जाया गया और बाद में एक चीनी नागरिक से जबरन शादी करा दी गई। खगराछड़ी की एक मारमा महिला ने भी इसी तरह का आरोप लगाया कि उसे एक चीनी व्यक्ति से शादी करने के लिए मजबूर किया गया। एक अन्य मामले में बागेरहाट की एक युवती ने आरोप लगाया कि उसे नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया, आपत्तिजनक सामग्री के जरिए धमकाया गया और बाद में चीन ले जाकर उसका शोषण किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित मानव तस्कर और स्थानीय बिचौलिए परिवारों को आर्थिक सुरक्षा, नौकरी या विदेश में बेहतर भविष्य का लालच दे सकते हैं। इसके बाद वैध विवाह या परिवार के साथ विदेश जाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल महिलाओं को चीन पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। जांचकर्ताओं के सामने कथित तौर पर फर्जी पते, जाली दस्तावेज और फर्जी विवाह कागजात जैसे मामलों की जानकारी भी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में बिचौलियों ने चीन भेजने की प्रक्रिया के लिए 10 लाख से 20 लाख बांग्लादेशी टका तक की रकम लेने या मांगने का आरोप है। हालांकि, चीन जाने वाले सभी 4,226 Q1 वीजा धारकों को तस्करी का शिकार मानना उचित नहीं है। रिपोर्ट भी स्पष्ट करती है कि इनमें से कितनी महिलाएं वास्तव में मानव तस्करी का शिकार हुईं, इसका कोई विश्वसनीय आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट में बांग्लादेश में चीनी नागरिकों से जुड़े एक अन्य कथित संगठित अपराध मामले का भी उल्लेख किया गया है।मार्च में डिपार्टमेंट ऑफ नारकोटिक्स कंट्रोल ने ढाका के उत्तरा इलाके में एक अस्थायी केटामाइन प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में तीन चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया और करीब 6.3 किलोग्राम केटामाइन बरामद किए जाने का दावा किया गया। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े थे और कथित नेटवर्क में क्रिप्टोकरेंसी जैसे आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का बांग्लादेश में आर्थिक, कारोबारी और रणनीतिक प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही भी बढ़ रही है। मानव तस्करी को लेकर उठ रही चिंताएं अब यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या बांग्लादेश की नियामक और कानून प्रवर्तन एजेंसियां तेजी से बढ़ती सीमा पार गतिविधियों से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार हैं।
आंकड़ा अपराध नहीं, लेकिन खतरे की घंटी जरूर
चीन जाने वाली 4,226 महिलाओं का आंकड़ा अपने आप में मानव तस्करी का सबूत नहीं है। बहुत सी महिलाएं वैध पारिवारिक या वैवाहिक कारणों से चीन गई होंगी। लेकिन 2022 के सिर्फ 35 मामलों से 2025 में 1,721 तक पहुंची संख्या और इसके साथ सामने आए कथित तस्करी मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि वैध विवाह और परिवार के पुनर्मिलन जैसे रास्तों का इस्तेमाल अपराधी महिलाओं की तस्करी के लिए न कर सकें।