Edited By Pardeep,Updated: 21 Jun, 2026 11:34 PM

अमेरिका और ईरान के बीच कतर में चल रही बातचीत एक बार फिर बीच में ही टूट गई है। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई धमकियों के बाद ईरानी नेता बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी थी...
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत एक बार फिर बीच में ही टूट गई है। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई धमकियों के बाद ईरानी नेता बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। ट्रंप ने सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि ईरान को लेबनान में हिज्बुल्लाह की गतिविधियों और अपने प्रॉक्सी संगठनों को तुरंत रोकना होगा, वरना अमेरिका फिर से ईरान पर हमला करेगा।
ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम: 'पिछले हफ्ते से भी बुरा होगा अंजाम'
बैठक के दौरान यह खबर आई कि ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह लेबनान में अशांति फैला रहे अपने गुर्गों को मिल रही फंडिंग बंद करे। ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान ऐसा नहीं करता है, तो हम उन्हें पिछले सप्ताह की तरह ही, बल्कि उससे भी अधिक कठोर दंड देंगे।" इस बयान से ईरानी प्रतिनिधि बेहद नाराज हो गए और तेहरान ने वार्ता को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया।
ईरान का पलटवार: 'धमकी समझौते का उल्लंघन'
ईरान ने अमेरिका की इन धमकियों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि ट्रंप की बयानबाजी उस समझौते की धारा 1 का गंभीर उल्लंघन है, जिसके तहत अमेरिका को धमकियां देने से बचना था। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर ट्रंप को करारा जवाब देते हुए लिखा कि अमेरिका की ये धमकियां उसकी हताशा को दर्शाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी, "हमारी सेनाएं दूसरे तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम ही करेंगे।"
बातचीत के लिए ईरान की कड़ी शर्तें
ईरान ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इजरायल लेबनान से पूरी तरह पीछे नहीं हटता और सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त नहीं होता, तब तक अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। तेहरान को यह भी संदेह है कि वॉशिंगटन इस बातचीत का इस्तेमाल केवल इजरायल को सैन्य तैयारियों के लिए समय दिलाने के मकसद से कर रहा है। फिलहाल, ईरानी वार्ताकारों ने बातचीत को बीच में रोककर अपने शीर्ष नेताओं और कतर के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की है और वे अब अमेरिका के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।