Longest day Astrology: 21 जून को क्यों कहा जाता है साल का सबसे बड़ा दिन, जानें देवताओं की रात का गहरा रहस्य

Edited By Updated: 19 Jun, 2026 01:57 PM

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Longest day Astrology: जानें, 21 जून को ही क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? ग्रीष्म संक्रांति का खगोलीय और धार्मिक महत्व और क्यों इस दिन के बाद शुरू होती है 'देवताओं की रात'।

Longest day Astrology: साल का हर दिन अपने आप में खास होता है, लेकिन 21 जून की तारीख खगोलीय और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से अद्वितीय है। यह केवल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि इस दिन ब्रह्मांड में एक बड़ी घटना घटती है जिसे 'ग्रीष्म संक्रांति' (Summer Solstice) कहा जाता है। 21 जून का दिन हमें प्रकृति के अद्भुत चक्र और ग्रहों की चाल से जुड़ने का संदेश देता है। यह दिन वैज्ञानिक जिज्ञासा और धार्मिक आस्था का एक सुंदर मेल है।

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आखिर 21 जून को ही क्यों होता है सबसे लंबा दिन?
खगोलीय विज्ञान के अनुसार, 21 जून को पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि इसका उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अपने अधिकतम झुकाव पर होता है।

इस दौरान सूर्य की किरणें कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर सीधे पड़ती हैं। परिणामस्वरूप सूर्य आकाश में अधिक समय तक रहता है और भारत सहित उत्तरी गोलार्ध के देशों में दिन की अवधि लगभग 13 से 14 घंटे तक बढ़ जाती है, जिससे रात साल की सबसे छोटी रात बन जाती है।

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क्या है 'ग्रीष्म संक्रांति' का अर्थ?
'संक्रांति' शब्द का अर्थ है सूर्य का एक स्थिति से दूसरी में गमन।  21 जून को सूर्य अपनी उत्तर दिशा की यात्रा के चरम बिंदु पर पहुंच जाता है। इसके बाद सूर्य की दिशा दक्षिण की ओर मुड़ने लगती है जिसे 'दक्षिणायन' की शुरुआत कहा जाता है। यही कारण है कि इस तारीख के बाद धीरे-धीरे दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।

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ज्योतिष का अद्भुत रहस्य: शुरू होती है 'देवताओं की रात'
भारतीय शास्त्रों और ज्योतिष में सूर्य की गति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति से शुरू होने वाला छह महीने का समय 'उत्तरायण' कहलाता है, जिसे देवताओं का दिन माना गया है। वहीं, 21 जून के बाद जब सूर्य दक्षिणायन की ओर कदम बढ़ाता है, तो इसे 'देवताओं की रात' का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय साधना और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने के लिए श्रेष्ठ होता है।

आध्यात्मिक ऊर्जा और योग का संगम
हिंदू परंपरा में सूर्य को केवल एक तारा नहीं, बल्कि चेतना और प्राण शक्ति का स्रोत माना गया है।  ग्रीष्म संक्रांति का यह समय आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद शक्तिशाली माना जाता है। इसी ऊर्जा परिवर्तन के महत्व को देखते हुए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में भी चुना गया है, ताकि मनुष्य अपनी आंतरिक शक्तियों को ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ जोड़ सके।

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