3 बार रिपेयर के बाद भी नहीं चली 1.26 लाख की घड़ी, अब एथोस कंपनी को लगा झटका

Edited By Updated: 13 Aug, 2026 07:05 PM

1 26 lakh watch failed to work even after three repairs oris faces a setback

बहुत से लोग एथोस घड़ी पहनने का शौक रखते हैं, लेकिन एक शख्स को इस घड़ी को खरीदना महंगा पड़ गया है। दरअसल, मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 36-C निवासी हितेश अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है। एक शिकायतकर्ता हितेश अग्रवाल के अनुसार उसने 3 दिसंबर 2023 को इलांटे मॉल...

चंडीगढ़ : बहुत से लोग एथोस घड़ी पहनने का शौक रखते हैं, लेकिन एक शख्स को इस घड़ी को खरीदना महंगा पड़ गया है। दरअसल, मामला चंडीगढ़ के सेक्टर 36-C निवासी हितेश अग्रवाल की शिकायत से जुड़ा है। एक शिकायतकर्ता हितेश अग्रवाल के अनुसार उसने 3 दिसंबर 2023 को इलांटे मॉल स्थित अधिकृत रीसेलर एथोस समिट स्टोर से 1,26,800 रुपये में 'ओरिस बिग क्राउन' लग्जरी घड़ी खरीदी थी। उन्हें दो साल की वारंटी वाला कार्ड भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद घड़ी ठीक नहीं हुई।  

एथोस कंपनी को लगा बड़ा झटका

महंगी घड़ी ठीक न होने के बाद एथोस कंपनी को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने लग्जरी घड़ी में बार-बार खराबी आने के मामले में एथोस समिट स्टोर, इलांटे मॉल, चंडीगढ़ और ओरिस वॉचेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को उपभोक्ता को 1,26,800 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। साथ ही आयोग ने दोनों पक्षों को शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और कानूनी कार्रवाई के खर्च के लिए 10,000 रुपये मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

वारंटी के दौरान 3 बार खराब हुई घड़ी

शिकायतकर्ता के मुताबिक, खरीदारी के कुछ समय बाद ही घड़ी ने काम करना बंद कर दिया। इसे 10 जून 2024 को पहली बार मरम्मत के लिए जमा कराया गया। मरम्मत के बाद घड़ी कुछ समय तक चली, लेकिन करीब तीन महीने के भीतर फिर खराब हो गई। इसके बाद 19 सितंबर 2024 को इसे दूसरी बार सर्विस सेंटर में जमा कराया गया। दूसरी बार मरम्मत के करीब दो महीने बाद घड़ी में दोबारा खराबी आ गई। शिकायतकर्ता को बताया गया कि घड़ी में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है और इसे तीसरी बार मरम्मत के लिए जमा करने को कहा गया। अग्रवाल ने 12 नवंबर 2024 को घड़ी फिर जमा करा दी। हालांकि, तीसरी बार मरम्मत के बाद भी घड़ी ठीक नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बार-बार खराबी और मरम्मत के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

स्टोर ने जिम्मेदारी से किया इनकार

शिकायत का विरोध करते हुए एथोस समिट स्टोर ने कहा कि वह प्रीमियम घड़ियों का अधिकृत रिटेलर है और उसने घड़ी की बिक्री तथा वारंटी के तहत सर्विस में मदद की थी। स्टोर का कहना था कि उसने घड़ी का निर्माण या उसमें कोई बदलाव नहीं किया है। इसलिए किसी छिपी हुई मैन्युफैक्चरिंग खराबी के लिए निर्माता को जिम्मेदार माना जाना चाहिए। स्टोर ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता को वारंटी के तहत अधिकृत सर्विस चैनल उपलब्ध कराया गया और हर बार शिकायत पर उचित कार्रवाई की गई। वहीं, घड़ी निर्माता कंपनी को मामले की जानकारी होने के बावजूद आयोग के समक्ष पेश नहीं होने पर 8 दिसंबर 2025 को उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।

आयोग ने माना- घड़ी ठीक होने लायक नहीं

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि घड़ी में वारंटी अवधि के दौरान ही खराबी शुरू हो गई थी और तीन बार मरम्मत की कोशिश के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई। आयोग ने कहा कि इन परिस्थितियों में यह माना जा सकता है कि घड़ी ठीक होने लायक नहीं है। ऐसे में शिकायतकर्ता को घड़ी की इनवॉइस कीमत वापस करना उचित है। इसी आधार पर आयोग ने एथोस समिट स्टोर और ओरिस वॉचेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 1,26,800 रुपये की राशि वापस करने और 10,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

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