Edited By Ramkesh,Updated: 13 Aug, 2026 07:48 PM

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार के मामले में केवल आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। मरांडी ने कहा कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं (आईपीएस...
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार के मामले में केवल आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। मरांडी ने कहा कि कानून के हाथ इनके गिरेबान तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं (आईपीएस अधिकारियों) तक जांच की आंच क्यों नहीं पहुंच पाई है ? आज तक कोई भी आईपीएस अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया?
सरकारी खजाने की लूट में लिप्त आईएएस
उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा है कि जब भ्रष्टाचार और सरकारी खजाने की लूट में लिप्त आईएएस अधिकारी जेल जा सकते हैं, तो खाकी वर्दी वाले आईपीएस अधिकारियों को यह‘अभेद्य सुरक्षा कवच'किसने दे रखा है? मरांडी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से हमने देखा कि भ्रष्टाचार के महापाप में कई शीर्ष आईएएस अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
राज्य को दीमक की तरह चाट रहे हैं अधिकारी
जांच एजेंसियों ने कारर्वाई की और यह साबित हुआ कि प्रशासनिक तंत्र का एक हिस्सा राज्य को दीमक की तरह चाट रहा था। लेकिन क्या अपराध और भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य पुलिस की मिलीभगत के बिना चल सकता है? जिस राज्य में कोयला, बालू, पत्थर और लौह अयस्क का अरबों रुपयों का अवैध कारोबार दिन-दहाड़े धड़ल्ले से चल रहा है, क्या वह बिना पुलिसिया संरक्षण के संभव है? उन्होंने कहा कि आए दिन अवैध ज़मीन के काले धंधे, खुलेआम रंगदारी वसूली, कुख्यात सुजीत सिन्हा जैसे आपराधिक गिरोहों के साथ पुलिस की सांठगांठ और यहां तक कि भोले-भाले आदिवासियों की ज़मीनें हड़पने के मामलों में पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आते हैं। एक पूर्व डीजीपी तक के तार अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से जुड़ने के संगीन आरोप लगे।
पुलिस महकमे के रसूखदारो तक नहीं पहुंचती जांच
राज्य की अस्मिता लुटती रही, लेकिन आज तक कोई भी आईपीएस अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं गया? उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या यह संभव है कि राज्य में संगठित अपराध और माफियाओं का इतना बड़ा नेक्सस बिना किसी आईपीएस की संलिप्तता के चल रहा हो? फिर यह कैसा सिस्टम है जहाँ आईएएस अधिकारियों के गिरेबान तक तो कानून के हाथ पहुंच जाते हैं, लेकिन पुलिस महकमे के रसूखदार आकाओं पर जांच की आंच तक नहीं आती?
दल लगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा
उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आज पूरे झारखंड को इस असमानता पर विचार करने की जरूरत है। राज्य के जो गिने-चुने ईमानदार आईएएस/आपीएस अधिकारी हैं, उन्हें भी आज गंभीरता से सोचना चाहिए कि आखिर इस सड़े हुए सिस्टम में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को बचाने वाला वह अद्दश्य‘कवच'क्या है? जब सजा और बदनामी सिफर् आईएएस के हिस्से आ रही है, तो आईपीएस अधिकारियों को‘सात खून माफ'का यह विशेषाधिकार क्यों?