Edited By Parveen Kumar,Updated: 08 Jul, 2026 07:01 PM

इस बार का मानसून मुंबई के लिए सिर्फ भारी बारिश ही नहीं, बल्कि गंभीर हादसों की वजह भी बनता जा रहा है। 1 जुलाई से 6 जुलाई के बीच महज छह दिनों में शहर और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में पेड़ गिरने की 1,100 घटनाएं दर्ज की गईं। यह संख्या पिछले तीन वर्षों...
नेशनल डेस्क : इस बार का मानसून मुंबई के लिए सिर्फ भारी बारिश ही नहीं, बल्कि गंभीर हादसों की वजह भी बनता जा रहा है। 1 जुलाई से 6 जुलाई के बीच महज छह दिनों में शहर और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में पेड़ गिरने की 1,100 घटनाएं दर्ज की गईं। यह संख्या पिछले तीन वर्षों के पूरे मानसून सीजन में दर्ज मामलों से भी अधिक है। इन हादसों में अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है।
24 घंटे में 523 पेड़ गिरे, जनजीवन प्रभावित
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ही 523 पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। इनमें 188 मामले पश्चिमी उपनगरों, 185 दक्षिण मुंबई (आइलैंड सिटी) और 150 पूर्वी उपनगरों में दर्ज किए गए। पेड़ गिरने से कई प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गईं, यातायात प्रभावित हुआ और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। इसके अलावा अनेक वाहन और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं। बुधवार को अंधेरी ईस्ट में एक जामुन के पेड़ की भारी शाखा राहगीर के सिर पर गिर गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं, माटुंगा के किंग सर्कल इलाके में एक विशाल पेड़ मुख्य सड़क पर गिर गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर पेड़ हटाया और यातायात बहाल कराया।
पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड टूटा
BMC के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के पूरे मानसून सीजन में 855, वर्ष 2024 में 653 और वर्ष 2023 में 687 पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके विपरीत, इस वर्ष मानसून के पहले सप्ताह में ही 1,100 पेड़ गिर चुके हैं। इस असामान्य वृद्धि ने शहर में पेड़ों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
BMC ने तेज हवाओं को बताया कारण
नगर निगम का कहना है कि पिछले तीन दिनों से मुंबई में 72 से 78 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सामान्य मानसून के दौरान हवाओं की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, लेकिन इस बार सक्रिय मानसूनी प्रणाली के कारण हवा की रफ्तार लगभग तीन गुना तक पहुंच गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा कि 75 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार वाली हवाओं के कारण बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए हैं। उन्होंने नागरिकों से खराब मौसम के दौरान केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की।
पर्यावरणविदों ने उठाए रखरखाव पर सवाल
हालांकि, पर्यावरणविद देवी गोयनका ने BMC के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि केवल तेज हवाएं ही पेड़ों के गिरने का कारण होतीं, तो वर्ष 2020 और 2021 के शक्तिशाली चक्रवातों के दौरान, जब हवाओं की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची थी, तब इससे कहीं अधिक पेड़ गिरने चाहिए थे। उनके अनुसार, पेड़ों के गिरने की मुख्य वजह शहर में अनियोजित निर्माण कार्य, पेड़ों की जड़ों के आसपास कंक्रीट और पेवर ब्लॉक बिछाना तथा वैज्ञानिक तरीके से छंटाई न किया जाना है।
उन्होंने बताया कि BMC के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेड़ के चारों ओर कम से कम एक मीटर खुली मिट्टी छोड़ी जानी चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर जड़ों तक पूरी तरह कंक्रीट कर दिया गया है। इससे जड़ें कमजोर हो जाती हैं और तेज हवाओं के दौरान पेड़ आसानी से उखड़ जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार विशेषज्ञों की निगरानी के बिना पेड़ों की छंटाई की जाती है, जिससे उनका संतुलन बिगड़ जाता है।
हादसों में पांच लोगों की मौत
पिछले छह दिनों में पेड़ गिरने की घटनाओं में पांच लोगों की जान जा चुकी है।
- चेंबूर में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई।
- आरे कॉलोनी में 18 वर्षीय सैयद सलमान की पेड़ की शाखा गिरने से जान चली गई।
- कुर्ला में 63 वर्षीय यूनुस कुंडावाला की दुकान पर पेड़ गिरने से उनकी मौत हो गई।
- मीरा-भायंदर में बाइक सवार राहुल पाटिल पेड़ गिरने से घायल हुए थे, जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।
- इसके अलावा, एक अन्य घटना में भी एक व्यक्ति की जान गई, जबकि जोगेश्वरी, वर्ली, गोरेगांव समेत कई इलाकों में अनेक लोग घायल हुए हैं।
BMC ने जारी की एडवाइजरी
लगातार बढ़ रही घटनाओं के बीच BMC की राहत टीमों पर भारी दबाव है। निगम का कहना है कि बड़े और पुराने पेड़ों को हटाने में समय लग रहा है, क्योंकि उन्हें शाखा-दर-शाखा काटकर सुरक्षित तरीके से हटाना पड़ता है। एहतियात के तौर पर मुंबई के सभी सार्वजनिक उद्यान अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें तथा अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।