Edited By Parveen Kumar,Updated: 26 Aug, 2026 08:36 PM

नेपाल में तिब्बत-चीन सीमा के पास अचानक आई भीषण बाढ़ से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों का एक समूह प्रभावित हुआ है। बाढ़ में एक इमिग्रेशन सेंटर के बह जाने की खबर है, जहां ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन वॉलंटियर मौजूद थे।
नेशनल डेस्क : नेपाल में तिब्बत-चीन सीमा के पास अचानक आई भीषण बाढ़ से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों का एक समूह प्रभावित हुआ है। बाढ़ में एक इमिग्रेशन सेंटर के बह जाने की खबर है, जहां ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन वॉलंटियर मौजूद थे। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि वे खुद इलाके में मौजूद हैं और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में मदद कर रहे हैं।
सद्गुरु ने बताया कि उनकी यात्रा में शामिल 21 समूहों के 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अभी तिब्बत और नेपाल में हैं। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है और उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्यिरोंग इलाके में अचानक आई बाढ़ ने इमिग्रेशन ऑफिस और शहर के बड़े हिस्से को प्रभावित किया है। सद्गुरु ने प्रभावित तीर्थयात्रियों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि बचाव अभियान में हरसंभव मदद की जा रही है।
यह घटना बुधवार तड़के नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवा और धाडिंग जिलों में हुई, जहां बाढ़ से सड़कें और अन्य जरूरी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, रसुवागढ़ी चेकपॉइंट पर कैलाश-मानसरोवर यात्रा के करीब 400 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो पाया है। इनमें 100 से अधिक भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल प्रभावित लोगों का पता लगाने में जुटे हैं।