मतदाता सूची में नाम की गलती से कोई विदेशी नहीं हो जाता', अजहर-आबिदा सहित 27 लोगों को SC ने दी बड़ी राहत

Edited By Updated: 13 Jul, 2026 02:37 PM

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देश की सर्वोच्च अदालत ने नागरिकता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नागरिकता खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संबंधित प्राधिकारी के आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि नागरिकता जैसे...

नेशनल डेस्क: देश की सर्वोच्च अदालत ने नागरिकता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए नागरिकता खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संबंधित प्राधिकारी के आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि नागरिकता जैसे संवेदनशील मामलों में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना आवश्यक है।

27 लोगों को असम हाई कोर्ट ने घोषित किया था विदेशी 
दरअसल, असम में पुरानी मतदाता सूचियों (वोटर लिस्ट) में नामों की स्पेलिंग में अंतर की वजह से असम में 27 लोगों 'विदेशी' घोषित कर दिया गया था। इस मामले को लेकर लोगों ने अदालत का रुख किया। असम हाई कोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद लोगों को विदेशी घोषित कर दिया। पीड़ित पक्ष ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सभी पक्षों पर सुनवाई की। इसके पर कोर्ट ने आज अहम फैसला सुनाया। अदालत ने गुवाहाटी हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के पुराने फैसलों को रद्द करते हुए सभी 27 मामलों को संबंधित विदेशी ट्रिब्यूनल को दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से सुनवाई के दिए आदेश 
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 27 अपीलों को मंजूरी दी और मामलों को नए सिरे से सुनवाई के लिए संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (विदेशी न्यायाधिकरण) के पास वापस भेज दिया। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता एक अहम संवैधानिक और कानूनी महत्व का मामला है, जिसके लिए सुनवाई के दौरान निष्पक्षता के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करना जरूरी है। बेंच ने कहा, 'नागरिकता और विदेशी होने का दर्जा बहुत ज़्यादा संवैधानिक और कानूनी महत्व रखता है। राज्य की ये सुनिश्चित करने में जायज और अहम दिलचस्पी है कि जो लोग कानूनी तौर पर भारतीय नागरिकता का दावा करने के हकदार नहीं हैं, वह प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल, झूठे दावों या देरी का फायदा उठाकर ऐसा दर्जा हासिल न कर सकें। 

सुरक्षा उपायों की अनदेखी बिल्कुल भी न हो
हालांकि, अदालत ने जोर देकर कहा कि इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए कानूनी और प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की अनदेखी बिल्कुल भी नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि उनका ये आदेश केवल मामलों के नए और कानूनी रूप से वैध निर्धारण को सुनिश्चित करने तक ही सीमित है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के नागरिकता दावों की मेरिट की जांच नहीं की है और न ही उनके द्वारा प्रस्तुत किसी डॉक्यूमेंट्स की प्रामाणिकता, प्रासंगिकता या पर्याप्तता पर कोई राय व्यक्त की है। 

सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत 
याचिकाकर्ताओं का तर्कइस मामले में 27 लोगों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिनमें सबित्री डे, अजबाहर अली, मोहम्मद अकबर अली, अबेदा खातून और अनवारा खातून शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मजबूती से तर्क दिया था कि पुरानी मतदाता सूचियों (वोटर लिस्ट) में नामों की छोटी-मोटी मामूली स्पेलिंग में अंतर जैसी हाइपर टेक्निकल गलतियों के कारण ही उन्हें सीधे विदेशी घोषित कर दिया गया था। इस कारण उन्हें अपने ही देश में नागरिकता से पूरी तरह वंचित होना पड़ रहा था, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लोगों ने राहत दी है लेकिन अब अंतिम फैसला फिर हाईकोर्ट आ सकता है। 

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