फास्ट ट्रैक सुनवाई में आरोपी को उम्रकैद, POCSO केस में कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

Edited By Updated: 02 Jun, 2026 02:51 PM

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दिल्ली की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई को आठ दिनों में पूरा कर लिया और 38 वर्षीय दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।

नेशनल डेस्क: दिल्ली की एक अदालत ने एक नाबालिग लड़की से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले की सुनवाई को आठ दिनों में पूरा कर लिया और 38 वर्षीय दोषी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।

पीड़िता 32 सप्ताह से अधिक की हुई गर्भवती
पुलिस के अनुसार, 17 अप्रैल, 2026 को जब एफआईआर दर्ज की गई तब पीड़िता 32 सप्ताह से अधिक की गर्भवती थी। उसने आरोप लगाया कि उसके पड़ोसी ने जुलाई 2025 में कई बार उसका यौन उत्पीड़न किया था। पीड़िता ने कहा कि आरोपी उसके घर के सामने रहता था और उसके परिवार में उसका आना-जाना था। उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके भाई-बहनों को पास की दुकान पर भेजने के बाद पहले उसका उत्पीड़न किया और बाद में उसे धमकाया कि वह घटना का खुलासा न करे। 

पीड़िता की मां ने दर्ज कराया था केस 
पुलिस ने बताया कि यौन अपराध रोकथाम बाल संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत मामला दर्ज होने के 34 दिनों के भीतर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। आठ दिनों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और अगले दिन सजा निर्धारित की। मामला तब सामने आया जब नाबालिग लड़की गर्भवती हो गई और उसने अपनी मां को कथित यौन उत्पीड़न के बारे में बताया। पीड़िता 17 अप्रैल को अपने माता-पिता के साथ निहाल विहार पुलिस स्टेशन पहुंची। 

आरोपी को पुलिस ने भेजा जेल 
उसके बयान के आधार पर उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान पीड़िता को चिकित्सा जांच के लिए भेजा गया जिससे पुष्टि हुई कि वह 32 सप्ताह से अधिक की गर्भवती थी। मामले की जांच के लिए एक विशेष पुलिस दल का गठन किया गया और एफआईआर दर्ज होने के उसी दिन आरोपी को निहाल विहार इलाके से गिरफ्तार किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयानों और डीएनए जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भरोसा किया।

अंतिम सांस तक जेल में रहेगा आरोपी 
अदालत ने 29 मई को अपना फैसला सुनाया और 30 मई को सजा का आदेश पारित करते हुए दोषी को आजीवन कारावास और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। पुलिस के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया कि आजीवन कारावास का मतलब दोषी के शेष जीवनकाल तक कारावास होगा। पीड़िता के लिए 16.5 लाख रुपये की मुआवज़ा राशि भी स्वीकृत की गई है। 

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