Edited By Mehak,Updated: 07 Jan, 2026 04:28 PM

हरियाणा के फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव में संजय और सुनीता के परिवार में 19 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे का जन्म हुआ। इससे पहले उनके घर 10 बेटियां थीं। परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं रखी। बेटे के...
नेशनल डेस्क : हरियाणा के फतेहाबाद जिले के ढाणी भोजराज गांव में इन दिनों एक खुशियों भरी खबर हर किसी की जुबान पर है। संजय और सुनीता के परिवार में 19 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे का जन्म हुआ है। इससे पहले इस दंपती को 10 बेटियां हुई थीं।
बेटियों के समान बेटा भी बना परिवार की पूंजी
संजय बताते हैं कि उन्होंने अपनी बेटियों को कभी बेटों से कम नहीं माना। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने सभी बेटियों की पढ़ाई और संस्कारों में कोई कमी नहीं रखी। उनकी सबसे बड़ी बेटी 18 साल की है और 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। परिवार की सादगी और मेहनत के कारण यह परिवार अब गांव में मिसाल माना जा रहा है।
बेटे का जन्म और अस्पताल में देखभाल
हाल ही में सुनीता ने 11वीं संतान को जन्म दिया। इस बार उनके घर बेटे की खुशी आई। डिलीवरी नॉर्मल रही, लेकिन नवजात में खून की कमी पाई गई। डॉक्टरों ने समय पर खून चढ़ाकर बच्चे को स्वस्थ किया। वर्तमान में मां और बच्चा दोनों ठीक हैं।
दादी की मन्नत हुई पूरी
संजय की मां माया देवी इस खुशी से अत्यंत खुश हैं। उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ने मेरी वर्षों की मन्नत पूरी कर दी। परिवार में मिठाइयां बांटी जा रही हैं और दूर-दराज के रिश्तेदार बधाई देने पहुंचे हैं।
संघर्षों भरी जिंदगी, हौसले बुलंद
संजय का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वह पहले लोक निर्माण विभाग में काम करते थे, लेकिन 2018 में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद उन्होंने मनरेगा के तहत मजदूरी की। पिछले एक साल से वह बेरोजगार हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा मेहनत करते रहे।
बेटियों के लिए भी विशेष प्यार
संजय और सुनीता ने एक बेटी को रिश्तेदारी में गोद दिया, जबकि बाकी 9 बेटियों की जिम्मेदारी खुद निभाई। उनका कहना है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। पढ़-लिखकर बेटियां अपने पैरों पर खड़ी होंगी, यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं।
अब पूरे गांव में होगा सम्मान
19 साल बाद बेटे के जन्म की यह कहानी ढाणी भोजराज और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बन गई है। गांव की सरपंच ज्योति देवी ने इस परिवार को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। संजय और सुनीता कहते हैं कि उनकी खुशियां सिर्फ बेटे तक सीमित नहीं हैं, बेटियां भी उनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।