Edited By Mehak,Updated: 07 Jan, 2026 11:03 AM

पिता की संपत्ति में बेटी का हक शादीशुदा होने पर भी सुरक्षित है। 2005 में हिंदू सक्सेशन एक्ट में किए गए संशोधन के अनुसार, बेटी को पिता की एचयूएफ संपत्ति में उतना ही हिस्सा मिलता है जितना बेटे को। शादी या पिता के जीवित होने का इस हक पर असर नहीं पड़ता।...
नेशनल डेस्क : पैतृक संपत्ति में बेटी के अधिकार को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, खासकर जब बेटी की शादी हो चुकी हो। कई लोग यह सोचते हैं कि शादी के बाद बेटी का हक समाप्त हो जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। 2005 में हिंदू सक्सेशन एक्ट (Hindu Succession Act) में संशोधन के बाद बेटी को भी अपने पिता की संपत्ति में उतना ही अधिकार मिला है जितना बेटे को।
2005 का संशोधन और बेटी का हक
हिंदू सक्सेशन एक्ट, 1956 में 9 सितंबर, 2005 को बदलाव किया गया। इसके अनुसार:
बेटी चाहे विवाहित हो या अविवाहित, उसे अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलता है। यह हक जन्म से ही स्थापित हो जाता है, यानी बेटी अपने जन्म से ही संपत्ति की हिस्सेदार बन जाती है। बंटवारे में हिस्सेदारी तीन हिस्सेदारों में मां, बेटा और बेटी के बीच हो सकती है, लेकिन सहमति से बंटवारा भी संभव है।
इनकम टैक्स नियमों का ध्यान
HUF की संपत्ति के बंटवारे के लिए इनकम टैक्स विभाग की मान्यता जरूरी है। फुल पार्टिशन की ऑर्डर की रिकॉर्डिंग संबंधित इनकम टैक्स अफसर से कराना जरूरी होता है, ताकि कानूनी और टैक्स संबंधी दिक्कतें न आएं।