Edited By Ramkesh,Updated: 18 Jun, 2026 02:55 PM

एक शोध में बड़ी जानकारी सामने निकल कर आई है। अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और गर्भधारण में दिक्कत जैसी समस्याओं से जूझ रही पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) की महिलाओं के लिए योग नई उम्मीद लेकर आया है।
नेशनल डेस्क: एक शोध में बड़ी जानकारी सामने निकल कर आई है। अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, हार्मोनल असंतुलन और गर्भधारण में दिक्कत जैसी समस्याओं से जूझ रही पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) की महिलाओं के लिए योग नई उम्मीद लेकर आया है। AIIMS की स्टडी में पाया गया है कि 12 सप्ताह तक योग करने वाली महिलाओं में मासिक धर्म की नियमितता बेहतर हुई, हार्मोन संतुलित हुए, वजन कम हुआ और शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में कमी आई। शोधकर्ताओं का कहना है कि योग पीसीओएस के मूल कारणों पर असर डालने वाली सुरक्षित, कम खर्चीली और लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली थेरेपी साबित हो सकती है।
महिलाओं की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतिया
दरअसल, पीसीओएस आज महिलाओं की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है। यह केवल प्रजनन क्षमता ही नहीं, बल्कि मेटाबॉलिज्म, हार्मोनल संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए किए गए एक अध्ययन में 25 महिलाओं को शामिल किया गया। जिन्होंने 12 सप्ताह तक नियमित योग किया और कोई अन्य इलाज नहीं लिया। योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान (मेडिटेशन) कराया गया।
बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य का संकेत
AIIMS की स्टडी में 11 फरवरी 2026 को मेडिकल जर्नल में छपी है। इस स्टडी में दावा किया गया है कि योग के बाद महिलाओं के पीरियड्स अधिक नियमित हुए और हार्मोनल प्रोफाइल में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया। जांच में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH), एंटी-म्यूलरियन हार्मोन (AMH) और टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी दर्ज की गई। वहीं, फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH), एस्ट्राडियोल और सेक्स हार्मोन बाइंडिंग ग्लोब्युलिन (SHBG) के स्तर में बढ़ोतरी देखी गई, जो बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है।
मेटाबॉलिक जांच में सकारात्मक बदलाव
शोधकर्ताओं के अनुसार, योग से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम हुआ, माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता बेहतर हुई, इंसुलिन सिग्नलिंग में सुधार आया और सूजन के स्तर में कमी दर्ज की गई। मेटाबॉलिक जांच में भी सकारात्मक बदलाव सामने आए। स्टडी में शामिल लोगों में शुगर लेवल, फ्रुक्टोज, डी-राइबोज, जैथिन, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर में कमी देखी गई। साथ ही वजन में भी गिरावट आई। विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीओएस के बढ़ते मामलों के बीच योग महिलाओं के लिए ऐसा विकल्प बन सकता है, जो दवाओं के साथ मिलकर बीमारी के मैनेजमेंट को अधिक प्रभावी बना सके।