Edited By Rohini Oberoi,Updated: 06 Mar, 2026 10:22 AM

आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकार राज्य में जनसंख्या के असंतुलन को रोकने के लिए एक बड़ा दांव खेलने जा रही है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में प्रस्ताव रखा है कि राज्य में दूसरे या उससे ज्यादा बच्चे के जन्म पर माता-पिता को 25,000 रुपये की...
Andhra Pradesh 25000 Birth Incentive Scheme : आंध्र प्रदेश की टीडीपी सरकार राज्य में जनसंख्या के असंतुलन को रोकने के लिए एक बड़ा दांव खेलने जा रही है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में प्रस्ताव रखा है कि राज्य में दूसरे या उससे ज्यादा बच्चे के जन्म पर माता-पिता को 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि (Birth Incentive) दी जाएगी। यह कदम राज्य की गिरती फर्टिलिटी रेट को सुधारने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
लक्ष्य: 1.5 से 2.1 तक पहुंचाना है फर्टिलिटी रेट
मुख्यमंत्री नायडू ने सदन को संबोधित करते हुए चिंता जताई कि राज्य की टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) फिलहाल 1.5 है जो कि रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से काफी नीचे है। यदि जन्म दर इसी तरह गिरती रही तो आने वाले समय में आंध्र प्रदेश में युवाओं की कमी और बुजुर्गों की आबादी बढ़ जाएगी जैसा कि वर्तमान में जापान और कई यूरोपीय देशों में देखा जा रहा है। सीएम ने कहा कि डिलीवरी के समय ही ₹25,000 देना एक गेम-चेंजर साबित होगा और परिवारों को आर्थिक संबल देगा।
पुराने नियमों में बदलाव की तैयारी
दिलचस्प बात यह है कि कभी चंद्रबाबू नायडू ने ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कड़े नियम बनाए थे लेकिन अब वे वक्त के साथ अपनी नीति बदल रहे हैं:
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चुनाव लड़ने की पाबंदी हटेगी: पहले नियम था कि दो से ज्यादा बच्चे वाले लोग स्थानीय निकाय चुनाव (Local Body Elections) नहीं लड़ सकते थे। अब सरकार इस कानून को बदलने पर विचार कर रही है ताकि ज्यादा बच्चों वाले लोग भी चुनाव लड़ सकें।
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फैमिली प्लानिंग से पॉपुलेशन मैनेजमेंट तक: 2004 से पहले जहां फोकस परिवार नियोजन पर था वहीं अब सरकार पॉपुलेशन मैनेजमेंट पर जोर दे रही है।
कब से लागू होगी नई पॉलिसी?
मुख्यमंत्री ने जनसंख्या प्रबंधन की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि नई पॉलिसी का ड्राफ्ट मार्च के अंत तक तैयार कर लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल 2026 से इस योजना को पूरे राज्य में लागू कर दिया जाए।
सीएम का तर्क: "लोग ही देश की असली ताकत"
नायडू ने भावुक होते हुए कहा कि एक देश सिर्फ जमीन, कस्बों या सरहदों से नहीं बनता, बल्कि वह अपने लोगों से बनता है। युवाओं की आबादी कम होना किसी भी राज्य के भविष्य के लिए आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा कर सकता है।