Edited By Pardeep,Updated: 13 Jul, 2026 10:41 PM

2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश का दोषी...
नई दिल्ली: 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश का दोषी पाया है। जैसे ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने फैसला सुनाया, ताहिर हुसैन अदालत में ही फफक-फफकर रोने लगा। सजा के ऐलान के बाद मीडिया के कैमरों के सामने उसने खुद को बेकसूर बताते हुए कहा, "मेरे साथ इंसाफ नहीं हुआ है।"
नाले में मिला था आईबी अधिकारी का शव
यह मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब आईबी में तैनात अंकित शर्मा कार्यालय से घर लौटने के बाद लापता हो गए थे। अंकित के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत के अनुसार, स्थानीय लोगों ने जानकारी दी थी कि उनके बेटे की हत्या कर दी गई है और शव को चांद बाग पुलिया के पास एक मस्जिद के पास नाले में फेंक दिया गया है। बाद में अंकित का शव खजूरी खास नाले से बरामद किया गया था। पिता ने आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने अंकित की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ठिकाने लगा दिया।
कोर्ट ने इन आरोपों में ठहराया दोषी
अदालत ने ताहिर हुसैन को न केवल हत्या, बल्कि वैमनस्य फैलाने, दंगा करने, मारपीट और आपराधिक बल प्रयोग के आरोपों में भी दोषी पाया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दंगाई ताहिर हुसैन के दफ्तर में जमा हुए थे। ताहिर के साथ 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी मामले दर्ज थे, जिनमें से अदालत ने पांच को दोषी करार दिया है। दोषियों की सूची में हसीन उर्फ मुल्लाजी, नाज़िम, कासिम और समीर खान जैसे नाम शामिल हैं।
CAA हिंसा के दौरान भड़के थे दंगे
यह घटना फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा थी। इन दंगों में कुल 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दंगों में नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया था। अदालत ने माना कि ताहिर हुसैन ने सार्वजनिक अशांति फैलाने के लिए लोगों को उकसाने वाले बयान दिए थे।