Edited By Pardeep,Updated: 03 Aug, 2026 04:21 AM

महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद लागू हो गया। इसके साथ ही राज्य में जबरन, धोखेबाजी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई...
नेशनल डेस्कः महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद लागू हो गया। इसके साथ ही राज्य में जबरन, धोखेबाजी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, 2026 को मार्च में बजट सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों ने पारित किया था। इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 30 जुलाई को राज्य राजपत्र में अधिसूचित किया गया। नए कानून के तहत, किसी अन्य धर्म को अपनाने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी। इसके साथ ही धर्म परिवर्तन के बाद निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना भी अनिवार्य होगा।
महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 के तहत बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, मिथ्या प्रस्तुतीकरण या विवाह से जुड़े छल के माध्यम से कराए गए धर्मांतरण को दंडनीय अपराध बनाया गया है। कानून के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। वहीं दोबारा अपराध करने पर सजा बढ़ाकर 10 वर्ष तक की जा सकती है। इस कानून के तहत पीड़ित के माता-पिता, भाई-बहन और अन्य निकट संबंधियों को भी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है।