Edited By Anu Malhotra,Updated: 15 Oct, 2026 08:52 AM

क्या आपके या आपके किसी अपने के जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है? बहुत से लोग इसे सिर्फ 'बढ़ती उम्र का असर' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह अर्थराइटिस (गठिया) का संकेत हो सकता है।
नई दिल्ली: क्या आपके या आपके किसी अपने के जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है? बहुत से लोग इसे सिर्फ 'बढ़ती उम्र का असर' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह अर्थराइटिस (गठिया) का संकेत हो सकता है। एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञों के अनुसार, अर्थराइटिस शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, हालांकि यह सबसे ज्यादा घुटनों और हाथों में देखा जाता है। अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए, तो हड्डियों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अर्थराइटिस क्या है, इसके प्रकार और लक्षण क्या हैं।
अर्थराइटिस क्या है?
अर्थराइटिस जोड़ों की एक ऐसी समस्या है जिसमें उनमें सूजन, दर्द और अकड़न पैदा हो जाती है और शरीर की गतिशीलता (Mobility) कम हो जाती है। यह समस्या मुख्य रूप से जोड़ों के बीच के कार्टिलेज के घिसने, ऑटोइम्यून कंडीशंस या जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जमने के कारण होती है।
अर्थराइटिस के मुख्य प्रकार
विशेषज्ञों के अनुसार अर्थराइटिस कई तरह का होता है, जिनमें से प्रमुख ये हैं:
रुमेटॉइड अर्थराइटिस : यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही जोड़ों पर हमला करके सूजन पैदा करता है।
गाउट: यह जोड़ों में यूरिक एसिड बढ़ने और क्रिस्टल जमा होने के कारण होता है।
जुवेनाइल अर्थराइटिस: यह 16 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली एक इंफ्लेमेटरी बीमारी है।
सोरायटिक अर्थराइटिस: यह सोराइसिस (त्वचा की बीमारी) से जुड़े लोगों में होने वाली ऑटोइम्यून समस्या है।
एंकाइलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस: इससे मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और उससे जुड़े जोड़ प्रभावित होते हैं।
अर्थराइटिस के प्रमुख लक्षण
यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो सावधान हो जाएं:
-उठने-बैठने या चलने-फिर में जोड़ों में लगातार दर्द रहना।
-प्रभावित जोड़ के आसपास सूजन आ जाना।
-जोड़ों के आसपास की त्वचा का रंग लाल पड़ जाना।
-हाथ-पैरों के जोड़ों में गर्माहट या जलन महसूस होना।
-खासकर सुबह उठने पर जोड़ों में भारी अकड़न रहना।
किसे होता है अर्थराइटिस का सबसे ज्यादा खतरा?
-बढ़ती उम्र के वयस्क।
-जिन लोगों के परिवार (जेनेटिक्स) में अर्थराइटिस का इतिहास रहा हो।
-ओवरवेट या मोटापे से पीड़ित लोग।
-जिन्हें पहले कभी कोई गंभीर जॉइंट इंजरी या इंफेक्शन हुआ हो।
-स्मोकिंग करने वाले या शारीरिक रूप से सुस्त रहने वाले लोग।
-वे लोग जिनकी जॉब में भारी वजन उठाना या घुटनों पर ज्यादा जोर देना पड़ता है।
अर्थराइटिस के दर्द को कैसे मैनेज करें?
भले ही अर्थराइटिस एक लंबी चलने वाली बीमारी है, लेकिन सही लाइफस्टाइल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है:
-हफ्ते में कम से कम 150 मिनट वॉक करें और योग को अपनी रूटीन में शामिल करें।
-सामान्य बॉडी वेट बनाए रखने से घुटनों और जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है।
-ऐसी चीजें खाएं जो सूजन को कम करें और शरीर को पोषण दें।
-डॉक्टर की सलाह से पेन-रिलीविंग जेल, क्रीम या दवाइयों का इस्तेमाल करें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करें।