Edited By Anu Malhotra,Updated: 12 Oct, 2026 12:37 PM

फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसर में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़ों का कैंसर सबसे आगे था। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर सही इलाज शुरू करने...
नई दिल्ली: फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसर में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़ों का कैंसर सबसे आगे था। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानकर सही इलाज शुरू करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।आइए जानते हैं फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती संकेत, इसके मुख्य कारण, जांच के तरीके और आधुनिक इलाज के विकल्पों के बारे में विस्तार से।
फेफड़ों के कैंसर के मुख्य लक्षण
WHO के अनुसार , शुरुआती स्टेज में फेफड़ों के कैंसर के लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए लोग इन्हें आम बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर नीचे दिए गए लक्षण 2 से 3 हफ्ते तक लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
-छाती में लगातार दर्द: छाती या पसलियों में हर समय दर्द रहना।
-लंबे समय तक रहने वाली खांसी: ऐसी खांसी जो जल्दी ठीक न हो और वक्त के साथ और गंभीर हो जाए।
-सांस फूलना: अक्सर सांस फूलना या गहरी सांस लेने में परेशानी महसूस होना।
-थकान और कमजोरी: शरीर में हर समय अत्यधिक थकान रहना।
-अचानक वजन घटना: बिना किसी कोशिश या डाइट बदलाव के वजन तेजी से कम होना।
-खांसते समय खून आना: खांसते समय मुंह से खून या बलगम में खून के निशान आना।
-बार-बार इंफेक्शन: ब्रोंकाइटिस या निमोनिया जैसे फेफड़ों के संक्रमण बार-बार होना।
किन लोगों को रहता है सबसे ज्यादा खतरा?
फेफड़ों का कैंसर होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं:
धूम्रपान: सिगरेट, बीड़ी, सिगार या पाइप पीने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है।
पैसिव स्मोकिंग: जो लोग खुद स्मोकिंग नहीं करते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के संपर्क में रहते हैं।
प्रदूषण और केमिकल्स: लगातार अत्यधिक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना, या सिलिका, एस्बेस्टस और डीजल के धुएं वाली जगहों पर काम करना।
रेडॉन गैस एक्सपोजर: प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली रेडियोधर्मी रेडॉन गैस के संपर्क में आना।
जेनेटिक्स और पुरानी बीमारियां: परिवार में किसी को कैंसर का इतिहास होना या फेफड़ों से जुड़ी पुरानी बीमारियां होना।
फेफड़ों के कैंसर की जांच कैसे की जाती है?
समय रहते जांच कराने से इस गंभीर बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
फिजिकल एग्जामिनेशन: मरीज के स्वास्थ्य की सामान्य जांच।
छाती का एक्स-रे (X-Ray) और सीटी स्कैन (CT Scan)।
ब्रोंकोस्कॉपी, फेफड़ों के अंदरूनी हिस्से की जांच करने की प्रक्रिया।
टिश्यू बायोप्सी और मॉलिक्यूलर टेस्टिंग- फेफड़ों से ऊतकों का सैंपल लेकर कैंसर की कोशिकाओं और उसके प्रकार की सटीक जांच करना।
किसको करवानी चाहिए स्क्रीनिंग?
जो लोग अत्यधिक धूम्रपान करते हैं या जिनकी फैमिली हिस्ट्री रही है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर फुल बॉडी हेल्थ चेकअप और लो-डोज़ सीटी स्कैन करवाना चाहिए।
फेफड़ों के कैंसर का इलाज
फेफड़ों के कैंसर का इलाज कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, मरीज की सेहत और मॉलिक्यूलर प्रोफाइल के आधार पर तय किया जाता है:
सर्जरी : शुरुआती स्टेज में ट्यूमर को ऑपरेशन करके शरीर से निकाल दिया जाता है।
कीमोथेरेपी: दवाओं के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी: हाई-एनर्जी एक्स-रे का इस्तेमाल करके कैंसर ट्यूमर को बढ़ने से रोका जाता है (खासतौर तब जब सर्जरी संभव न हो)।
टारगेटेड थेरेपी: यह खास तौर पर कैंसर कोशिकाओं की जीन या प्रोटीन पर हमला करती है।
इम्यूनोथेरेपी: यह शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को मजबूत करती है ताकि वह कैंसर से लड़ सके। एडवांस स्टेज में इलाज के तरीके बदल सकते हैं, इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें और बीमारी को बढ़ने न दें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या या लक्षण के दिखने पर हमेशा अपने नजदीकी डॉक्टर या स्पेशलिस्ट से परामर्श लें।