Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 May, 2026 08:35 AM

Gold Import Duty Hike: भारत में सोना और चांदी खरीदना अब पहले से महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने सोना और चांदी पर कुल आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
Gold Import Duty Hike: भारत में सोना और चांदी खरीदना अब पहले से महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने सोना और चांदी पर कुल आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के बाद बाजार में गोल्ड और सिल्वर की कीमतों पर असर देखने को मिल सकता है। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, सोना और चांदी के आयात पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस जोड़ा गया है। इस तरह कुल टैक्स बढ़कर 15 प्रतिशत पहुंच गया है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है।
एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार का मकसद देश में सोने के बढ़ते आयात को नियंत्रित करना है। पिछले कुछ समय में गोल्ड इंपोर्ट तेजी से बढ़ा था, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ने लगा था। सरकार चाहती है कि गैर-जरूरी आयात कम हों और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। शादी-ब्याह और निवेश के कारण यहां गोल्ड की मांग लगातार बनी रहती है। लेकिन ज्यादा आयात होने से देश का ट्रेड बैलेंस प्रभावित होता है। इसी वजह से सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2024 के बजट में सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था। ड्यूटी कम होने के बाद गोल्ड इंपोर्ट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद शुल्क फिर पुराने स्तर के करीब पहुंच गया है। हालांकि, कुछ अधिकारियों और कारोबार से जुड़े लोगों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि import duty बहुत ज्यादा बढ़ता है तो सोने की तस्करी के मामले बढ़ सकते हैं। पहले भी ऊंची ड्यूटी के दौरान अवैध तरीके से गोल्ड लाने के मामले सामने आते रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में ज्वेलरी कारोबार, गोल्ड निवेश और आम ग्राहकों की खरीदारी पर इसका असर दिख सकता है। कीमतें बढ़ने से मांग में कुछ कमी आने की संभावना है, जबकि निवेशक दूसरे विकल्पों की तरफ भी रुख कर सकते हैं।